जीबीसी प्रस्ताव 2025 (हिन्दी)

यह अनुवाद एआई की सहायता से तैयार किया गया हो सकता है। सभी स्थितियों में इन प्रस्तावों का अंग्रेज़ी मूल संस्करण ही निर्णायक संस्करण है।
This translation may have been produced with the help of AI. In all instances the English original is the definitive version of these resolutions. Read the English original · All translations

इस्कॉन गवर्निंग बॉडी कमीशन सोसाइटी

पश्चिम बंगाल सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1961 के अंतर्गत पंजीकरण संख्या S/74662 पो. श्री मायापुर धाम, जिला नदिया, पश्चिम बंगाल 741313

वार्षिक आम बैठक 2025 के प्रस्ताव

2025 के क्षेत्रीय कार्यभार (ज़ोनल असाइनमेंट) देखें

खंड 200: गवर्निंग बॉडी कमीशन

204.02: जीबीसी बैठकें: जीबीसी निर्णय

[शीर्षक] – जीबीसी बैठकों में सुधार — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – वक्तव्य [पारित होने की तिथि] – 16 फ़रवरी, 2025

जबकि जीबीसी कार्यकारी समिति ने जीबीसी संगठनात्मक विकास समिति से अनुरोध किया कि वह जीबीसी के, जिसमें बैठकें भी शामिल हैं, बेहतर कार्य-संचालन का प्रस्ताव दे

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी निकाय अपनी वार्षिक आम बैठक (AGM) में सुधार के लिए निम्नलिखित कदमों का समर्थन करता है। इन्हें कार्यकारी समिति द्वारा अनुभवी और प्रशिक्षित सुविधाप्रदाताओं (फ़ैसिलिटेटर) तथा अन्य सलाहकारों का मार्गदर्शन लेकर प्राप्त किया जाना चाहिए:

1. कार्यसूचियों को सुव्यवस्थित करना: जीबीसी बैठकों को आवश्यक कार्यसूची-विषयों पर केंद्रित रहना चाहिए, ताकि जीबीसी ईसी द्वारा निर्धारित कम महत्वपूर्ण विषयों पर समय नष्ट न हो। सर्वेक्षण के परिणाम स्पष्ट रूप से वर्तमान कार्यसूची-चयन, बैठक-पूर्व तैयारी और चर्चाओं के संचालन के ढंग के प्रति असंतोष दर्शाते हैं। केवल जीबीसी के उत्तरदायित्वों से संबंधित आवश्यक विषयों को ही शामिल किया जाना चाहिए, और अन्य विषयों पर उचित ढंग से कार्यवाही की जानी चाहिए।

2. बैठक-संस्कृति को बेहतर बनाना: कठोर समयपालन, जीबीसी आचार-संहिता (कोड ऑफ़ ऑनर) का पालन, और बैठक की कार्यवाही पर पूर्ण ध्यान को प्रोत्साहित करें, ताकि बैठकें अनावश्यक रूप से लंबी न खिंचें।

3. स्थल और प्रारूप में सुधार: मायापुर में बेहतर व्यवस्थाएँ विकसित करें, जिनमें कक्ष की बेहतर संरचना, तकनीकी सुधार आदि शामिल हों।

4. प्रभावी बैठक-प्रक्रियाएँ: a. बैठक-पूर्व तैयारी: प्रत्येक विषय के स्पष्ट लक्ष्यों के साथ कार्यसूचियाँ सदैव अग्रिम रूप से वितरित करें। जिन विषयों पर जीबीसी द्वारा चर्चा आवश्यक नहीं है, उन सभी को, जिनमें वे प्रस्ताव भी शामिल हैं जिनका विश्लेषण डिप्टी कर रहे हैं, कड़ाई से अन्यों को सौंप दें। b. बैठकों के दौरान: चर्चाओं को सही दिशा में बनाए रखने के लिए प्रभावी समय-प्रबंधन। रॉबर्ट्स रूल्स ऑफ़ ऑर्डर उचित उपयोग [sic] तथा जीबीसी आचार-संहिता द्वारा निर्देशित, आज़माई और परखी हुई सुविधा-प्रक्रियाओं का उचित उपयोग। c. बैठक-पश्चात अनुवर्ती कार्यवाही: कार्य-बिंदुओं पर प्रभावी अनुवर्ती कार्यवाही तथा प्रस्तावों का समयबद्ध और उचित संप्रेषण।

5. पूर्ण सहभागिता को प्रोत्साहित करना: a. सुविधाप्रदाता/अध्यक्ष बैठकों के दौरान जीबीसी की पूर्ण सहभागिता को प्रोत्साहित करने के लिए मानक प्रक्रियाओं का उपयोग करें, जैसे समूह-चर्चाओं में वृद्धि। b. जीबीसी ईसी अपने विवेकानुसार, अपने निर्देशन में बैठकों के संचालन में सहायता हेतु अनुभवी, तटस्थ सुविधाप्रदाताओं को नियुक्त कर सकती है। c. बैठकों में सुधार संबंधी अतिरिक्त दिशानिर्देश मीटिंग मैनुअल 2025 में दिए गए हैं, जो मूल रूप से 2016 में जीबीसी के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।

204.04 जीबीसी बैठकें: वार्षिक आम बैठक

[शीर्षक] — 2026 की जीबीसी वार्षिक आम बैठक की तिथियाँ — 2025

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य-आदेश [पारित होने की तिथि] — 22 फ़रवरी, 2025

संकल्प किया जाता है कि:

इस्कॉन गवर्निंग बॉडी कमीशन सोसाइटी की वार्षिक आम बैठक 4-14 फ़रवरी, 2026 को इस्कॉन मायापुर, पश्चिम बंगाल, भारत में आयोजित की जाएगी

204.06 जीबीसी बैठकें: मध्यावधि आम बैठक

[शीर्षक] — 2025 की जीबीसी मध्यावधि आम बैठक की तिथियाँ — 2025

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य-आदेश [पारित होने की तिथि] — 22 फ़रवरी, 2025

संकल्प किया जाता है कि:

इस्कॉन गवर्निंग बॉडी कमीशन सोसाइटी की मध्यावधि आम बैठक 1-5 अक्टूबर को विलाज्जो हरे कृष्ण, इटली में आयोजित की जाएगी

207.04: जीबीसी कर्मचारी: जीबीसी संसदीय विधि-विशेषज्ञ (पार्लियामेंटेरियन)

[शीर्षक] – जीबीसी पार्लियामेंटेरियन के पद की स्थापना — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – प्रशासनिक आदेश [पारित होने की तिथि] – 23 फ़रवरी, 2025

जबकि जीबीसी बैठकों का संचालन जीबीसी रूल्स ऑफ़ ऑर्डर (कार्य-संचालन नियमों) के अनुसार किया जाना अनिवार्य है;

जबकि यह अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ के हित में है कि जीबीसी बैठकों में उठाए गए विषयों पर, उठाए जाने वाले उचित कदमों का निर्धारण करने के लिए, जीबीसी रूल्स ऑफ़ ऑर्डर के अनुसार कुशलतापूर्वक और निष्पक्ष रूप से चर्चा की जाए;

जबकि सदस्य जीबीसी रूल्स ऑफ़ ऑर्डर से पर्याप्त रूप से परिचित नहीं हैं;

जबकि जीबीसी रूल्स ऑफ़ ऑर्डर कार्य-संचालन संबंधी प्रश्नों पर तथा नियमों के उचित अनुप्रयोग पर निर्णय देने का अधिकार जीबीसी अध्यक्ष को प्रदान करते हैं;

जबकि जीबीसी रूल्स ऑफ़ ऑर्डर विस्तृत और सविस्तार हैं तथा जीबीसी बैठकों के संचालन और प्रक्रिया से जुड़े सभी विषयों का उत्तर देने/उन्हें समाहित करने के लिए अभिप्रेत हैं;

जबकि यह महत्वपूर्ण है कि जीबीसी बैठकों में उपस्थित कम से कम एक व्यक्ति जीबीसी रूल्स ऑफ़ ऑर्डर से इतना परिचित हो कि वह जीबीसी बैठकों के उचित संचालन के विषय में अध्यक्ष और अन्य सदस्यों को परामर्श दे सके

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

एतद्द्वारा पार्लियामेंटेरियन के पद की स्थापना की जाती है।

कि जीबीसी इसकी स्थापना के पाँच वर्ष पश्चात पार्लियामेंटेरियन के पद के कार्य की समीक्षा करेगी।

परिभाषा पार्लियामेंटेरियन:

1. जीबीसी बैठकों में एक मताधिकार-रहित प्रतिभागी है, जो जीबीसी रूल्स ऑफ़ ऑर्डर में निर्धारित सभी जीबीसी बैठकों के नियमों और प्रक्रियाओं की व्याख्या करने और उन पर परामर्श देने में विशेषज्ञ है।

2. उन सभी जीबीसी बैठकों में भाग लेता है जिन पर जीबीसी रूल्स ऑफ़ ऑर्डर लागू होते हैं।

3. किसी भी जीबीसी बैठक में चर्चा किए जा रहे विषयों पर सारगर्भित बिंदु/तर्क प्रस्तुत नहीं करता, सिवाय उस स्थिति के जब ऐसा पार्लियामेंटेरियन अलग से कोई मंत्री या कोई अन्य गैर-जीबीसी प्रतिभागी हो।

4. जीबीसी बैठक की बहसों में सक्रिय भाग लेता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनका संचालन लागू जीबीसी रूल्स ऑफ़ ऑर्डर के अनुसार हो।

5. एक निष्पक्ष प्रतिभागी है जो जीबीसी अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के साथ अच्छे कार्य-संबंध बनाए रखता है।

अधिकार पार्लियामेंटेरियन की भूमिका:

1. इसे मताधिकार प्राप्त नहीं है।

2. किसी भी जीबीसी बैठक में चर्चा किए जा रहे विषयों पर सारगर्भित बिंदु/तर्क प्रस्तुत नहीं करता, सिवाय उस स्थिति के जब ऐसा पार्लियामेंटेरियन अलग से कोई मंत्री या कोई अन्य गैर-जीबीसी पदाधिकारी हो।

3. अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए किसी भी जीबीसी बैठक के दौरान किसी भी समय हस्तक्षेप कर सकता है।

4. जीबीसी बैठक के बाहर भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकता है, जिसमें, किंतु इन्हीं तक सीमित नहीं, जीबीसी रूल्स ऑफ़ ऑर्डर की व्याख्या और/या अनुप्रयोग पर अध्यक्ष और अन्य सदस्यों को (आवश्यकतानुसार) परामर्श देना शामिल है।

5. जीबीसी चर्चा सम्मेलन (डिस्कशन्स कॉन्फ़्रेंस) का सदस्य है।

कर्तव्य पार्लियामेंटेरियन:

1. जीबीसी रूल्स ऑफ़ ऑर्डर का पर्याप्त व्यावहारिक ज्ञान रखता है।

2. परामर्श या हस्तक्षेप द्वारा अध्यक्ष और अन्य सदस्यों को जीबीसी रूल्स ऑफ़ ऑर्डर की व्याख्या और अनुप्रयोग पर निष्पक्ष मार्गदर्शन प्रदान करता है।

3. जीबीसी रूल्स ऑफ़ ऑर्डर का एक अद्यतन संस्करण संकलित करता है और इसे प्रत्येक दो वर्ष में सदस्यों को प्रसारित करता है।

4. जीबीसी रूल्स ऑफ़ ऑर्डर की स्थिति पर, जिसमें नियमों को संशोधित करने, जोड़ने या हटाने की आवश्यकता भी शामिल है, जीबीसी को परामर्श देता है।

5. व्यवस्था के प्रश्नों (पॉइंट्स ऑफ़ ऑर्डर) और संसदीय पूछताछों का उत्तर देने के लिए जीबीसी अध्यक्ष (या संबंधित जीबीसी बैठक के पीठासीन अधिकारी) को परामर्श देता है।

6. जीबीसी अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के साथ अच्छे कार्य-संबंध बनाए रखता है।

चयन प्रक्रिया जीबीसी के जनरल काउंसल (प्रधान विधि-परामर्शदाता) पार्लियामेंटेरियन के पद के लिए जीबीसी के समक्ष उम्मीदवारों को नामित करेंगे। पार्लियामेंटेरियन का चयन जीबीसी के साधारण बहुमत के मत से किया जाता है।

जहाँ कोई नामित उम्मीदवार साधारण बहुमत से निर्वाचित नहीं होता, वहाँ जनरल काउंसल किसी अन्य उम्मीदवार को नामित करेंगे।

पार्लियामेंटेरियन का कार्यकाल 5 वर्ष का होगा, या तब तक का होगा जब तक पार्लियामेंटेरियन पद से त्यागपत्र न दे दे अथवा जीबीसी के दो-तिहाई बहुमत के मत से अयोग्य न ठहराया जाए।

पार्लियामेंटेरियन कितने कार्यकाल तक पद धारण कर सकता है, इसकी कोई सीमा नहीं है।

खंड 300: अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ

301.01: इस्कॉन सदस्य: नियम

[शीर्षक] – इस्कॉन में पुष्प-समाधियाँ — 2025

[बैठक] – ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] – शासी विधि [पारित होने की तिथि] – 19 मार्च, 2025

जबकि परस्पर विरोधी अंतिम निर्देशों से बचने के लिए पुष्प-समाधियों की स्थापना के विषय में एक स्पष्ट प्रस्ताव आवश्यक है;

जबकि समय बीतने के साथ वरिष्ठ वैष्णवों का प्रयाण अधिक होता जा रहा है, जिससे एक संक्षिप्त वक्तव्य की तात्कालिक आवश्यकता उत्पन्न हो रही है

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

19 मार्च, 2025 से प्रभावी, भविष्य में इस्कॉन के किसी भी सदस्य के लिए कोई पुष्प-समाधि नहीं बनाई जाएगी। कोई भी वरिष्ठ वैष्णव, जिनके अनुयायी समाधि बनाने का चयन करते हैं, जीबीसी वैष्णव स्मारक स्थायी समिति (वैष्णव मेमोरियल स्टैंडिंग कमेटी) की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद कुल मिलाकर केवल एक ही समाधि बना सकते हैं।

इस्कॉन का प्रत्येक गुरु अपनी वसीयत में यह निर्देश सम्मिलित करेगा।

301.07: इस्कॉन सदस्य: व्यक्तिगत भक्त

[शीर्षक] — इस्कॉन में दीक्षा गुरु के रूप में नरहरि दास का निलंबन — 2024

[बैठक] – ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] – वक्तव्य [पारित होने की तिथि] — 24 जुलाई, 2024

जबकि जीबीसी निकाय ने 2023 में नरहरि दास को दीक्षा देने से निलंबित कर दिया था;

जबकि वह निलंबन आदेश 19 फ़रवरी, 2025 को समाप्त होता है;

जबकि नरहरि दास को इस निलंबन आदेश के विषय में निश्चित रूप से बार-बार स्मरण कराया गया है;

जबकि नरहरि दास ने इस आदेश की अवहेलना करना चुना है;

जबकि नरहरि दास की दीक्षाओं ने इस्कॉन के कई कानूनों का उल्लंघन किया है

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

1. 20 फ़रवरी, 2020 के बाद नरहरि दास (ACBSP) द्वारा दी गई दीक्षाएँ इस्कॉन में मान्य नहीं हैं।

2. इस्कॉन में दीक्षा गुरु के रूप में नरहरि दास का निलंबन अनिश्चित काल तक तब तक जारी रहेगा, जब तक वे पूर्वोक्त विषयों का समाधान गुरु सर्विसेज़ कमेटी और जीबीसी निकाय की सहमति के अनुसार नहीं कर लेते।

3. किसी भी इस्कॉन मंदिर के साथ नरहरि दास और उनके “शिष्यों” का संग स्थानीय अधिकारियों और स्थानीय जीबीसी के निर्णय पर छोड़ा जाएगा।

302.05: इस्कॉन में आश्रम (आध्यात्मिक आश्रम-व्यवस्था): सामान्य

[शीर्षक] – इस्कॉन मंदिर आश्रमों की स्थापना और संचालन को प्रोत्साहन — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – दिशानिर्देश [पारित होने की तिथि] – 23 फ़रवरी, 2025

जबकि श्रील प्रभुपाद ने जीवंत आश्रमों वाले मंदिरों के बल पर इस्कॉन की स्थापना और निर्माण किया;

जबकि पश्चिम और अन्य स्थानों पर अनेक, बल्कि अधिकांश, इस्कॉन मंदिरों ने सामुदायिक (कॉन्ग्रिगेशनल) विकास की ओर बढ़ते हुए अपने आश्रमों को सीमित या बंद कर दिया है;

जबकि इस्कॉन में नेतृत्व-भूमिकाएँ ग्रहण करने के लिए योग्य भक्तों को खोजने की वर्तमान आवश्यकता को अधिक युवा भक्तों को आश्रम-प्रशिक्षण और अनुभव प्रदान करके काफ़ी हद तक पूरा किया जा सकता है

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी उन सभी इस्कॉन मंदिरों को, जिनमें वर्तमान में सक्रिय आवासीय आश्रम नहीं हैं, निम्नलिखित सर्वोत्तम पद्धतियों के अनुसार सोच-समझकर और परिश्रमपूर्वक उन्हें स्थापित या पुनःस्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करती है:

1. यद्यपि आवासीय आश्रमों में कभी-कभी वृद्ध भक्त भी रह सकते हैं, सामान्यतः मंदिर नए-नए कृष्णभावनामृत अपनाने वाले युवाओं को, भक्तों के रूप में उनके भावी जीवन के प्रशिक्षण-स्थल के रूप में, आश्रम-आवास प्रदान करेंगे। साथ ही, उन वृद्ध भक्तों के योगदान और आवश्यकताओं को, जिन्होंने अपने जीवन के अनेक वर्ष श्रील प्रभुपाद के आंदोलन को समर्पित किए हैं, अत्यंत मूल्यवान और सम्माननीय माना जाता है। मंदिर वृद्ध भक्तों को सहयोग देने और उन्हें समुदाय में सम्मिलित करने के लिए भी सुविधाएँ प्रदान कर सकते हैं। नवागंतुकों का स्वागत और पोषण करने के लिए हमें उनके लिए सुरक्षित आश्रम-स्थान प्रदान करना होगा, और साथ ही उन वरिष्ठ भक्तों का सम्मान और समायोजन भी करना होगा जिन्होंने इस आध्यात्मिक आंदोलन की नींव रखी है। यह संतुलित दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि वृद्ध और युवा, दोनों प्रकार के भक्तों की उनकी आध्यात्मिक यात्रा में देखभाल हो और उन्हें प्रोत्साहन मिले।

2. आवासीय आश्रम की दिनचर्या व्यवहार्य और संतुलित होनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों के पास साधना, सेवा, मनोरंजन और विश्राम के संतुलित जीवन के लिए पर्याप्त समय हो।

3. प्रारंभिक सेवा-कार्यों में साधारण कार्य शामिल हो सकते हैं, किंतु समय के साथ नेताओं को आश्रम-विद्यार्थियों को विविध अनुभवों में [sic] प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए, जिनमें कीर्तन, वाद्ययंत्रों, सार्वजनिक भाषण और प्रबंधन-कार्यों का प्रशिक्षण शामिल है।

4. आवासीय आश्रमों में समर्पित नेता होने चाहिए जो नए विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने की संवेदनशीलता को समझते हों और जिनकी एकमात्र सेवा नए विद्यार्थियों का कल्याण हो।

5. विश्व के उन भागों को छोड़कर जहाँ महिलाओं के आश्रम सांस्कृतिक रूप से अस्वीकार्य हैं, आवासीय आश्रमों को श्रील प्रभुपाद के निर्देशानुसार पुरुषों और महिलाओं के लिए पृथक किंतु समान सुविधा प्रदान करनी चाहिए।

6. समान आश्रम-सुविधा के अतिरिक्त, जहाँ सांस्कृतिक रूप से उचित हो, इच्छुक वैष्णवियों को पूजा, प्रचार और सेवा के लिए समान अवसर और प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।

7. आश्रम-विद्यार्थियों के लिए भक्ति शास्त्री और इस्कॉन डिसाइपल्स कोर्स के पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

8. चूँकि लगभग सभी नए भक्त विवाह करते हैं, इसलिए गृहस्थ-प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का अंग होना चाहिए, उनके लिए भी जो संन्यास (त्याग) के मार्ग पर चलने में रुचि रखते हैं।

307.04: इस्कॉन — अन्य: सामान्य

[शीर्षक] – अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ के लिए गौड़ीय वैष्णव सिद्धांत का संक्षिप्त वक्तव्य विषयक स्थिति-पत्र — 2025

[बैठक] – ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] – स्थिति-पत्र (पोज़ीशन पेपर) [पारित होने की तिथि] – 27 नवंबर, 2024

जबकि प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक प्रत्येक सफल संप्रदाय के पास अपने सिद्धांत को समाहित करने वाला किसी न किसी प्रकार का संक्षिप्त वक्तव्य रहा है;

जबकि इस्कॉन के लिए सिद्धांत का एक संक्षिप्त वक्तव्य हमारे आंदोलन की दार्शनिक एकता स्थापित करने में सहायक होगा, और साथ ही व्यावहारिक अनुप्रयोग में विविधता की अनुमति देगा;

जबकि श्रील भक्तिविनोद ठाकुर जैसे हमारे आचार्यों ने ऐसे कुछ वक्तव्य प्रदान किए हैं, किंतु इस्कॉन के लिए ऐसे वक्तव्यों को श्रील प्रभुपाद के ग्रंथों पर आधारित करना अधिक उपयुक्त होगा, क्योंकि उनकी शिक्षाएँ ही हमारे प्रमाण और दार्शनिक समझ का प्राथमिक स्रोत हैं

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी “अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ के लिए गौड़ीय वैष्णव सिद्धांत का संक्षिप्त वक्तव्य” स्थिति-पत्र को स्वीकृति देती है।

जीबीसी इस पत्र को तैयार करने में उनके प्रयासों के लिए परम पूज्य भक्ति-विज्ञान गोस्वामी और परम पूज्य बद्रीनारायण स्वामी का विशेष रूप से धन्यवाद करती है।

307.09: इस्कॉन — अन्य: भक्तिविनोद ठाकुर का पवित्र जन्मस्थान

[शीर्षक] – भक्तिविनोद ठाकुर के पवित्र जन्मस्थान का सम्मान — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – वक्तव्य [पारित होने की तिथि] – 23 फ़रवरी, 2025

जबकि बीरनगर श्रील भक्तिविनोद ठाकुर का जन्मस्थान है, और भक्तों के लिए इसका महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है;

जबकि श्रील प्रभुपाद ने इस गौड़ीय संप्रदाय के प्रख्यात आचार्य श्रील भक्तिविनोद ठाकुर की महिमा को विश्व भर में प्रसारित करने के लिए बीरनगर को विकसित करने की अपनी गहरी इच्छा व्यक्त की थी;

जबकि श्रील प्रभुपाद की यह गहन इच्छा थी कि बीरनगर में श्रील भक्तिविनोद ठाकुर के जन्मस्थान को आध्यात्मिक शिक्षा और तीर्थयात्रा के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करके उनका सम्मान किया जाए;

जबकि बीरनगर परियोजना प्रत्येक गौड़ीय वैष्णव के लिए, विशेषकर हमारे आंदोलन के लिए, सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है;

जबकि श्रील प्रभुपाद ने भक्तिविनोद गोष्ठी (बीरनगर द्वादश मंदिर की प्रबंध समिति), श्रील ललिता प्रसाद ठाकुर से अनुरोध किया था कि वे हमें यह सेवा करने की अनुमति दें। किंतु दुर्भाग्यवश, उन्होंने और समिति ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया;

जबकि 52 वर्षों के बाद भी हम सफल नहीं हो पाए हैं, क्योंकि भक्तिविनोद गोष्ठी अभी भी जन्मस्थान के विकास के हमारे प्रस्ताव से सहमत नहीं है;

जबकि भक्तिवेदान्त स्वामी चैरिटी ट्रस्ट के माध्यम से बीरनगर द्वादश शिव मंदिर के लिए कुछ जीर्णोद्धार और निर्माण-कार्य किए गए। बीरनगर भक्तिविनोद गोष्ठी निर्माण-कार्य स्वीकार करने को तैयार है, किंतु हमें कोई सेवायत-अधिकार देने को तैयार नहीं है। यदि वे सेवायत-अधिकार नहीं देते, तो निर्माण के बाद वे अपनी संपत्ति पर एक विशाल मंदिर का रख-रखाव करने में असमर्थ होंगे;

जबकि भक्तिविनोद गोष्ठी अभी तक हमें भूमि, न तो पट्टे पर और न ही किसी अन्य व्यवस्था के माध्यम से, देने को तैयार नहीं है;

जबकि श्रील प्रभुपाद की इच्छा के अनुसार इस्कॉन को भक्तिविनोद ठाकुर के लिए एक भव्य मंदिर स्थापित करना चाहिए, जिसके साथ उनके जीवन-इतिहास और उनके लेखन की प्रदर्शनी, एक शैक्षिक केंद्र, उद्यान और बगीचे, अतिथिगृह, एक आश्रम तथा और भी बहुत कुछ हो;

जबकि इस्कॉन को बीरनगर में भक्तिविनोद ठाकुर के जन्मस्थान के समीप भूमि क्रय करनी चाहिए और महान आचार्य श्रील भक्तिविनोद ठाकुर के लिए एक स्मारक और मंदिर विकसित करना चाहिए;

जबकि यह एक बड़ी परियोजना है, इसलिए इसे इस्कॉन द्वारा प्रत्यक्ष रूप से समर्थित और प्रबंधित किया जाना चाहिए

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

श्रील भक्तिविनोद ठाकुर के जन्मस्थान पर एक मंदिर स्थापित करने की श्रील प्रभुपाद की इच्छा और निर्देश को पूरा करने के लिए, जीबीसी इस महत्वपूर्ण पहल में बीरनगर परियोजना समिति का सक्रिय रूप से समर्थन करेगी।

इस योजना में जन्मस्थान के समीप, पट्टे के प्रतिबंधों से मुक्त भूमि पर, एक भव्य मंदिर और श्रील प्रभुपाद द्वारा परिकल्पित अन्य सुविधाओं का विकास शामिल है। वर्तमान मंदिर से मात्र 300 मीटर की दूरी पर स्थित 4.5 एकड़ का एक भूखंड उपलब्ध है, और समिति उसे प्राप्त करने पर कार्य कर रही है। साथ ही, समिति वर्तमान जन्मस्थान मंदिर का सेवायत-अधिकार प्राप्त करने के लिए बीरनगर द्वादश मंदिर के प्रबंधन के साथ वार्ता के प्रयास जारी रखेगी।

जीबीसी समिति को यह अधिकार देती है कि वह भक्त-समुदाय में इस परियोजना के आध्यात्मिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाए, और भक्तों को इसकी सेवा में सक्रिय रूप से भाग लेने तथा इसके सफल विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करे।

किसी भी धन-संग्रह प्रयास के लिए स्थानीय और क्षेत्रीय इस्कॉन नेतृत्व की अग्रिम लिखित स्वीकृति आवश्यक है।

खंड 400: इस्कॉन मंत्रालय, समितियाँ और कार्यालय

407.01: इस्कॉन विग्रह-आराधना मंत्रालय: मानक

[शीर्षक] – इस्कॉन में विग्रह-आराधना की शिक्षा — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – शासी विधि [पारित होने की तिथि] – 23 फ़रवरी, 2025

जबकि 1996 में जीबीसी ने मंत्रियों के लिए निम्नलिखित अधिदेश स्थापित किया था:

अपने विषय-क्षेत्र का पाठ्यक्रम स्थापित करना और इस ज्ञान को पूरे इस्कॉन में प्रसारित करना।

जबकि तुलना के लिए, 1997 में जीबीसी ने निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किया था:

कि ग्लोबल बुक डिस्ट्रीब्यूशन मिनिस्टर (वैश्विक ग्रंथ-वितरण मंत्री) द्वारा स्थापित पाँच-दिवसीय सेमिनार पाठ्यक्रम को सभी इस्कॉन ग्रंथ-वितरकों के लिए आधिकारिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के रूप में स्वीकार किया जाता है। यह पाठ्यक्रम निम्नलिखित सभी द्वारा लिया जाना है:

1. नए नियमित ग्रंथ-वितरक, अपने ग्रंथ-

2. वितरण जीवन के पहले बारह महीनों के भीतर, और

3. नियमित ग्रंथ-वितरक, गौर पूर्णिमा 1998 तक, और

4. अंशकालिक ग्रंथ-वितरकों को यह पाठ्यक्रम लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। ग्लोबल बुक डिस्ट्रीब्यूशन मिनिस्टर बुक डिस्ट्रीब्यूशन ग्रेजुएट कोर्स के मानक और विषय-वस्तु की देखरेख करने, उसे बढ़ावा देने और इस प्रस्ताव की आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी है।

जबकि 1999 से इस्कॉन विग्रह-आराधना मंत्रालय (IDWM) सक्रिय रूप से अपना पाठ्यक्रम विकसित करता और विश्व स्तर पर प्रस्तुत करता आ रहा है, और नियमित रूप से विश्व भर के देशों में पाठ्यक्रम आयोजित करता है;

जबकि भक्तों को प्रशिक्षित करने के 25 से अधिक वर्षों के अनुभव ने हमें दिखाया है कि पाठ्यक्रम को इस प्रकार कैसे प्रस्तुत किया जाए कि अभिजात्य पुजारी-मानसिकता से बचा जा सके, और यह भी कि इस्कॉन केंद्रों के लिए आराधना के यथार्थवादी, दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ मानक निर्धारित करने में भक्तों को संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के लिए कैसे मार्गदर्शन दिया जाए;

जबकि इस्कॉन विग्रह-आराधना मंत्रालय इस विषय-क्षेत्र के लिए जीबीसी द्वारा अधिदिष्ट प्रतिनिधि है, और इसलिए

इस्कॉन

के भीतर विग्रह-आराधना से संबंधित प्रामाणिक शिक्षाएँ प्रस्तुत करने के लिए सबसे उपयुक्त माध्यम है;

जबकि इस्कॉन विग्रह-आराधना मंत्रालय के पास अब विग्रह-आराधना के विविध विषयों तथा विग्रह-आराधना से संबंधित विषयों पर 20 से अधिक विभिन्न पाठ्यक्रम हैं;

जबकि किसी विशिष्ट विषय को पढ़ाते समय यह महत्वपूर्ण है कि सभी सुविधाप्रदाता समान अधिगम-उद्देश्यों को संबोधित करें और समान जानकारी प्रस्तुत करें, ताकि शिक्षार्थियों में, और

इस्कॉन

के भीतर भ्रम से बचा जा सके;

जबकि IDWM के जीबीसी-प्रदत्त अधिदेश के अनुरूप एक व्यवस्थित पाठ्यक्रम पूरे इस्कॉन में आराधना के सुसंगत मानकों को संभव बनाएगा;

जबकि इस्कॉन में विग्रह-आराधना पर अनियमित प्रस्तुतियाँ अधिक प्रचलित होती जा रही हैं। इनमें से कुछ प्रस्तुतियाँ तो हमारे संस्थापकाचार्य की शिक्षाओं को भी अमान्य ठहराती हैं;

जबकि श्रील प्रभुपाद ने कहा है:

हमारे आंदोलन के लिए सबसे बड़ा ख़तरा तब आएगा जब हम विग्रहों की आराधना के लिए अपनी स्वयं की प्रक्रिया गढ़ लेंगे और बना लेंगे। …ठीक उसी सटीक मानक के अनुसार इसका पालन करो जैसा मैंने तुम्हें दिया है, बस इतना ही।– ध्रुवानंद को पत्र — बॉम्बे 4 जनवरी, 1973

विग्रह-आराधना के संबंध में तुम्हें केवल वही करना चाहिए जो मैं तुम्हें बताता हूँ और दिखाता हूँ, और कभी भी कुछ भी मनगढ़ंत नहीं करना चाहिए या कहीं और देखी हुई किसी चीज़ की नक़ल नहीं करनी चाहिए। – नंद कुमार दास को व्यक्तिगत निर्देश

जबकि श्रील प्रभुपाद यह भी समझाते हैं:

अतः हमें धार्मिक सिद्धांतों को सम्प्रदायों के आचार्यों से ग्रहण करना होगा। अन्यथा वह व्यर्थ है। सम्प्रदायविहीना ये मन्त्रास्ते विफला मताः [पद्म पुराण]: “यदि तुम सम्प्रदाय की गुरु-शिष्य परंपरा से मंत्र-दीक्षा ग्रहण नहीं करते, तो वह व्यर्थ होगी…. अतः लोग इन प्रमाणों का कोई संदर्भ लिए बिना धर्म गढ़ रहे हैं। – श्रीमद्भागवतम् 6.1.34-39. 19 दिसंबर, 1970, सूरत

जबकि पाठ्यक्रम स्थापित करने और प्रसारित करने के लिए मंत्रालयों को पाठ्यक्रम का तथा उसे कौन पढ़ा रहा है, इसका नियमन करना आवश्यक है

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

1. इस्कॉन में प्रस्तुत, संपूर्ण रूप से विग्रह-आराधना से संबंधित सभी पाठ्यक्रमों को इस्कॉन विग्रह-आराधना मंत्रालय द्वारा स्वीकृत होना अनिवार्य है। इसमें निम्नलिखित विषयों पर पाठ्यक्रम शामिल हैं, किंतु यह इन्हीं तक सीमित नहीं है:

मंदिर में विग्रह-आराधना गृह में विग्रह-आराधना विग्रह-प्रतिष्ठा संस्कार उत्सवों का पालन

2. केवल वे भक्त ही विग्रह-आराधना और विग्रह-आराधना से संबंधित विषयों पर पाठ्यक्रम प्रस्तुत कर सकते हैं या पढ़ा सकते हैं, जो इस्कॉन विग्रह-आराधना मंत्रालय द्वारा अधिदिष्ट हैं। IDWM द्वारा विग्रह-आराधना पढ़ाने के लिए अधिकृत भक्तों के पास उचित शिक्षण-योग्यताएँ होंगी और वे जिस विषय को पढ़ा रहे हैं उस पर IDWM द्वारा स्वीकृत पाठ्यक्रम के स्नातक होंगे। IDWM समय-समय पर भक्तों को, IDWM द्वारा स्वीकृत पाठ्यक्रम पूरा किए बिना भी, विभिन्न विषय पढ़ाने की स्वीकृति दे सकता है।

3. IDWM द्वारा स्वीकृत सभी पाठ्यक्रमों में IDWM द्वारा स्वीकृत प्रमाणपत्र प्रदान करना अनिवार्य है।

407.01: इस्कॉन विग्रह-आराधना मंत्रालय: नियम

[शीर्षक] – बड़े विग्रहों को स्थानांतरित करना — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – शासी विधि [पारित होने की तिथि] – 23 फ़रवरी, 2025

प्रस्तावना: कभी-कभी यह प्रश्न उठता है कि बड़े संगमरमर के विग्रहों को स्थानांतरित करना स्वीकार्य है या नहीं। कुछ परिस्थितियों में विग्रहों को स्थानांतरित किया जा सकता है, किंतु ऐसा मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकता। विग्रहों को केवल उचित कारणों से ही स्थानांतरित किया जा सकता है। जैसा कि श्रील प्रभुपाद ने समझाया है, लाभ के लिए या कोई प्रतिष्ठित भवन प्राप्त करने के लिए विग्रहों को स्थानांतरित करना उचित उद्देश्य नहीं है। कभी-कभी ऐसा हो सकता है कि विग्रहों को स्थानांतरित करना अपरिहार्य हो, उन परिस्थितियों में जहाँ कोई प्राकृतिक आपदा विग्रह के लिए ख़तरा बन रही हो, या विग्रह को हानि से बचाने के लिए। कभी-कभी तब भी विग्रहों को स्थानांतरित करना आवश्यक हो सकता है जब कोई इस्कॉन केंद्र विग्रहों की देखभाल न कर सके। तथापि, सामान्य सिद्धांत यह है कि एक बार आराधना आरंभ हो जाने के बाद बड़े विग्रहों को कभी भी स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए। यह प्रस्ताव इसी प्रश्न का समाधान करता है।

जबकि श्रील प्रभुपाद सामान्यतः विग्रहों को स्थानांतरित करने के प्रबल विरोधी थे, जैसा कि निम्नलिखित अंश से स्पष्ट होता है:

विग्रहों की एक बार प्रतिष्ठा हो जाने के बाद उन्हें स्थानांतरित करना बहुत अच्छी नीति नहीं है। – करंधर को पत्र, 21 फ़रवरी, 1973

जबकि श्रील प्रभुपाद ने स्पष्ट रूप से अपनी आवश्यकताओं के अनुसार विग्रहों को स्थानांतरित करने का अनुमोदन नहीं किया। उन्होंने भक्तों को विग्रहों को एक नगर से दूसरे नगर ले जाने के लिए भी प्रोत्साहित नहीं किया, जैसा कि निम्नलिखित अंश से स्पष्ट होता है:

मैंने भगवान दास से सुना है कि तुम विग्रहों को डेट्रॉइट से स्थानांतरित करना चाहते हो। यह बहुत अच्छा प्रस्ताव नहीं है। सामान्यतः विग्रहों को केवल दिखावे के लिए कभी एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं हटाया जाता। भारत में एक बार विग्रह की प्रतिष्ठा हो जाने पर उसे किसी भी परिस्थिति में कभी नहीं हटाया जा सकता, यहाँ तक कि राजमार्ग भी उसके चारों ओर से बनाना पड़ता है। किंतु हमारे मामले में हमें कभी-कभी भवन बदलने पड़ सकते हैं, इसलिए हमें कभी विग्रह को एक भवन से दूसरे भवन में ले जाना पड़ सकता है, किंतु हम केवल अपनी सुविधा के लिए उन्हें एक नगर से दूसरे नगर नहीं ले जाएँगे। हम सदा इस प्रकार के परिवर्तनों के बारे में सोचते रहते हैं, ऐसा क्यों है? मैं बस यह चाहता हूँ कि जो हमारे पास है उसका विकास हो, न कि इतनी सारी बड़ी-बड़ी योजनाएँ बनाते रहना और हर समय बदलाव करते रहना, यह बहुत व्यावहारिक नहीं है। – सत्स्वरूप को पत्र, पेरिस 25 जुलाई, 1972

जबकि कभी-कभी जब भक्तों ने मंदिर बेचने और विग्रहों को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा, तो श्रील प्रभुपाद ने उनके उद्देश्यों पर प्रश्न उठाया, और अपनी इस स्थिति की पुनः पुष्टि की कि बड़े विग्रहों को किसी भी परिस्थिति में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता:

वॉशिंगटन मंदिर के विषय में, तुम वर्तमान भवन क्यों बेच रहे हो? तुम इसे क्यों बदल रहे हो? हम व्यापारी नहीं हैं कि लाभ के लिए बेचें और फिर विग्रह को स्थानांतरित करें। … तुम्हारे प्रश्नों के संबंध में, नहीं, बड़े विग्रह को कभी भी स्थानांतरित नहीं किया जा सकता, बिल्कुल नहीं। – रूपानुग को पत्र, नई दिल्ली 21 अगस्त, 1975

जबकि विग्रहों की प्रतिष्ठा और आराधना से संबंधित वैष्णव साहित्य में हमें विग्रहों को स्थानांतरित करने से रोकने वाले अनेक दृढ़ कथन हैं;

जबकि मत्स्य और भविष्य पुराण स्थायी रूप से प्रतिष्ठित विग्रह को स्थानांतरित करने के भयंकर परिणामों के विषय में हमें चेतावनी देते हैं:

स्थिरं न चालयेद् देवम् अन्यथा पापभाग् भवेत् स्थायी रूप से प्रतिष्ठित विग्रह को कभी भी स्थानांतरित नहीं करना चाहिए। यदि कोई ऐसा करता है, तो वह निश्चित रूप से पाप का भागी होगा। — (मत्स्य पुराण)

स्थिरं न चालयेद् देवं कदाचिद् अपि पिण्डतः अन्याद् विचालितो अज्ञानात् तस्मात्तं न विचालयेत् स्थायी रूप से प्रतिष्ठित विग्रह को उनके आसन से कभी भी नहीं हटाना चाहिए। यदि अज्ञानवश या भूल से किसी विग्रह को स्थानांतरित कर दिया जाता है, तो उत्तरदायी व्यक्ति को अपने (आध्यात्मिक) प्रगति-पथ पर बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। अतः स्थायी रूप से प्रतिष्ठित विग्रह को स्थानांतरित नहीं करना चाहिए। — भविष्य पुराण

जबकि बड़े पत्थर के विग्रह, अर्थात संगमरमर, ग्रेनाइट या अन्य प्रकार के पत्थर से बने विग्रह, सामान्यतः स्थायी रूप से प्रतिष्ठित की श्रेणी में आते हैं और इस प्रकार अचल माने जाते हैं;

जबकि पत्थर के विग्रह स्वभाव से भंगुर होते हैं, और वर्षों में स्थानांतरित किए जाते समय विग्रह टूटे भी हैं;

जबकि ऐसे अवसर भी आए जब श्रील प्रभुपाद ने यह भली-भाँति जानते हुए विग्रहों की स्थापना की कि भविष्य में उन्हें स्थानांतरित किया जाएगा। मुंबई में इस्कॉन जुहू ऐसा ही एक उदाहरण है। तथापि, श्रील प्रभुपाद ने ऐसा एक विशिष्ट उद्देश्य से किया था;

जबकि ऐसे अन्य उदाहरण भी हैं जहाँ श्रील प्रभुपाद ने विग्रहों की प्रतिष्ठा की और बाद में उन्हें स्थानांतरित किया;

जबकि श्रील प्रभुपाद ने पंडाल कार्यक्रमों के लिए विग्रहों की स्थापना की और बाद में उन्हें विश्व के विभिन्न भागों के मंदिरों में भेज दिया;

जबकि कभी-कभी विषम परिस्थितियों या आपात स्थितियों के कारण, जहाँ विग्रह संकट में हो, विग्रहों को शीघ्रता से स्थानांतरित करना पड़ता है। जैसे प्राकृतिक आपदाएँ या राजनीतिक अशांति/नागरिक हिंसा आदि।

जबकि विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर श्रीमद्भागवतम् 11.27.13 की अपनी टीका में समझाते हैं:

प्रतिष्ठा का अर्थ है “वह जो महान शक्ति के साथ या स्थायी रूप से स्थापित किया गया हो।” विग्रह-रूप सभी जीवों का आश्रय (जीव-मंदिरम्) है। इसका अर्थ है कि विग्रह साक्षात् भगवान हैं।

उसी तात्पर्य में वे यह भी लिखते हैं:

विसर्जन और आवाहन (प्रतिदिन भगवान का आवाहन करना और उन्हें विदा करना) की प्रक्रियाएँ विग्रह के स्थायी रूप (स्थिरायाम्) पर, चाहे वह चल हो या अचल, जो प्रतिष्ठित है, नहीं की जातीं, क्योंकि प्रतिष्ठा के समय भगवान का स्थायी रूप से आवाहन कर लिया गया था।

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

सामान्यतः, एक बार बड़े, पत्थर (या संगमरमर) के विग्रहों की स्थापना हो जाने के बाद उन्हें स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए। बड़े, पत्थर (या संगमरमर) के विग्रहों को लीलाओं के उत्सव के लिए या सफ़ाई अथवा रंग-रोगन जैसे अन्य प्रयोजनों के लिए स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए। विग्रहों को तब स्थानांतरित किया जा सकता है जब उन्हें किसी अन्य भवन या मंदिर में पुनःस्थापित करना आवश्यक हो।

विग्रहों को स्थानांतरित करने की इच्छा रखने वाले किसी भी इस्कॉन केंद्र को इस्कॉन विग्रह-आराधना मंत्रालय और स्थानीय जीबीसी से लिखित अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य है। अत्यधिक आपात स्थितियों में, जहाँ विग्रह तात्कालिक संकट का सामना कर रहे हों और IDWM या स्थानीय जीबीसी से संपर्क करने के लिए पर्याप्त समय न हो, स्थानीय अधिकारियों को विग्रहों की सुरक्षा के लिए निर्णय लेने का अधिकार है।

ऐसी स्थितियों में आराधना को कैसे जारी रखा जाए, इसके विवरण के लिए कृपया IDWM से संपर्क करें।

407.03: इस्कॉन विग्रह-आराधना मंत्रालय: दिशानिर्देश

[शीर्षक] – उचित तिथि के दिन उत्सवों का पालन — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – दिशानिर्देश [पारित होने की तिथि] – 23 फ़रवरी, 2025

जबकि यह सूचना मिली है कि कुछ इस्कॉन केंद्रों में प्रमुख उत्सव कभी-कभी ऐसे दिनों और समयों पर मनाए जाते हैं जो सामुदायिक भक्तों के उपस्थित होने के लिए सुविधाजनक हों, और वैष्णव कैलेंडर में पालन के लिए निर्दिष्ट दिनों पर नहीं मनाए जाते;

जबकि सामुदायिक भक्तों को मंदिर के उत्सवों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, फिर भी इन अवसरों को निर्धारित दिन और समय पर मनाना सर्वाधिक मंगलकारी है और सभी भक्तों के लिए अनुशंसित है। पूर्णकालिक साधक भक्तों और अन्य लोगों को, जो उन अत्यंत मंगलकारी दिनों और समयों पर पालन में भाग लेने के लिए मंदिर आ सकते हैं, यथासंभव ऐसा करने की सुविधा दी जानी चाहिए;

और जबकि श्रील प्रभुपाद ने हमारे संप्रदाय में प्रचलित निर्धारित दिनों और समयों के अनुसार उत्सवों के पालन पर बल दिया

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

सभी इस्कॉन केंद्रों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे:

1. सभी प्रमुख उत्सवों को उनकी वास्तविक तिथियों पर मनाएँ;

2. एक बार ऐसा पालन हो जाने के बाद, सामुदायिक भक्तों को भक्ति-सेवा में प्रेरित रखने के लिए, उसी प्रकार के अतिरिक्त आयोजन बाद के उन दिनों और समयों पर भी किए जा सकते हैं जो उनके उपस्थित होने के लिए अधिक सुविधाजनक हों। अतिरिक्त आयोजन आवश्यकता के अनुसार सरल या विस्तृत हो सकते हैं।

3. भक्तों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे श्रील प्रभुपाद के निर्देशों और जीबीसी दिशानिर्देशों के अनुसार उन वास्तविक तिथियों पर उपवास करें

उपर्युक्त नियम के अनुसार प्रमुख उत्सव माने जाने वाले उत्सवों की, उनके पालन-समय सहित, सूची निम्नलिखित है:

श्री गौर पूर्णिमा (संध्या) श्री राम नवमी (मध्याह्न) श्री नृसिंह चतुर्दशी (संध्या) श्री बलराम पूर्णिमा (मध्याह्न) श्री कृष्ण जन्माष्टमी (मध्यरात्रि) श्रील प्रभुपाद का आविर्भाव दिवस (मध्याह्न) श्री राधाष्टमी (मध्याह्न) श्रील प्रभुपाद का तिरोभाव दिवस (मध्याह्न) श्री नित्यानंद त्रयोदशी (मध्याह्न)

411.02: इस्कॉन हरिनाम संकीर्तन मंत्रालय: कीर्तन के मानक

[शीर्षक] – मंदिर कीर्तन दिशानिर्देश — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – दिशानिर्देश [पारित होने की तिथि] – 22 फ़रवरी, 2025

जबकि इस्कॉन में मंदिर-कक्ष कीर्तन के दिशानिर्देशों में स्पष्टता की आवश्यकता है।

अतः यह संकल्प किया जाता है कि: जीबीसी नीचे संलग्न मंदिर कीर्तन दिशानिर्देशों को स्वीकृति देती है। यह एक जीवंत दस्तावेज़ होगा, जिसे इस्कॉन कीर्तन मंत्रालय आवश्यकतानुसार संशोधित कर सकता है, बशर्ते ऐसे संशोधन पहले जीबीसी ईमेल सम्मेलन पर प्रसारित किए जाएँ और तीस दिनों के भीतर कोई आपत्ति प्राप्त न हो।

मंदिर कीर्तन दिशानिर्देश

अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) के संस्थापकाचार्य कृष्णकृपामूर्ति ए.सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद की शिक्षाओं पर आधारित

प्रस्तावना: भक्तों को सभी मंदिर-कीर्तनों में पूरे हृदय से कीर्तन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। प्रबंधकों को श्रील प्रभुपाद और वैष्णवों की प्रसन्नता के लिए इन मानकों को लागू करने का भरसक प्रयास करना चाहिए। प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे स्थानीय इस्कॉन प्रबंधन दल के मार्गदर्शन में प्रेमपूर्ण सहयोग की भावना से इन दिशानिर्देशों का पालन करें।

स्वर्णिम दिशानिर्देश:

1. सदैव विचार करें, “क्या यह कीर्तन श्रील प्रभुपाद को प्रसन्न करने वाला है?”

2. कीर्तन में सबसे महत्वपूर्ण ध्वनि सामूहिक कीर्तन की है, जिस पर वाद्ययंत्रों को कभी हावी नहीं होना चाहिए।

3. कीर्तन आकर्षक, स्वागतपूर्ण और सबको सम्मिलित करने वाला होना चाहिए।

कीर्तन-नेता

1. अधिमानतः, इस्कॉन के अच्छी स्थिति वाले दीक्षित भक्त, जो प्रतिदिन कम से कम 16 माला जप करते हों और चार विधि-विधानों का पालन करते हों। अथवा, यदि दीक्षित न हों, तो कम से कम चार विधि-विधानों का पालन करते हों, श्रील प्रभुपाद की शिक्षाओं को स्वीकार करते हों और नियमित रूप से जप करते हों।

2. वेशभूषा: अधिमानतः स्वच्छ और सादा वस्त्र, दाढ़ी-मूँछ बनी हुई, गौड़ीय वैष्णव तिलक सहित। पुरुषों के लिए धोती, कुर्ता और चादर को प्रोत्साहित किया जाता है। महिलाओं के लिए साड़ी या गोपी-वेश और शॉल को प्रोत्साहित किया जाता है। शॉर्ट्स और अन्य अंग-प्रदर्शक वस्त्रों को हतोत्साहित किया जाता है।

मंत्र

1. मंदिर की आरती-कीर्तनों के दौरान, पहले श्रील प्रभुपाद के प्रणाम मंत्र, पंचतत्त्व महामंत्र, और फिर हरे कृष्ण महामंत्र का कीर्तन करें, जो प्रत्येक कीर्तन का प्रमुख मंत्र होना चाहिए।

2. प्रत्येक आरती के बाद नृसिंह प्रार्थनाओं का कीर्तन करें।

3. निम्नलिखित को कभी-कभी गाया जा सकता है:

4. भजन, बीबीटी गीत-पुस्तिकाओं के मंत्र, और गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के गीत।

5. गोविंद जय जय गोपाल जय जय

6. हरये नमः कृष्ण यादवाय नमः / गोपाल गोविन्द राम श्री-मधुसूदन

7. जय शचीनंदन

8. निताई गौरांग

9. जय प्रभुपाद

10. राधाष्टमी के दिन श्रीमती राधारानी के पवित्र नामों का, कृष्ण से पृथक, कुछ मिनटों तक कीर्तन किया जा सकता है।

11. यह अनुशंसा की जाती है कि कोई शब्द या अक्षर जोड़ा या घटाया न जाए।

12. कीर्तन-नेताओं को सामूहिक प्रत्युत्तर-कीर्तन को भौतिक उपाधियों, जैसे पुरुष/महिला, के अनुसार विभाजित करने से बचना चाहिए।

13. मंत्र को छोटे-छोटे भागों में तोड़ने को प्रोत्साहित नहीं किया जाता।

14. कीर्तन पहले नेता द्वारा और फिर सामूहिक रूप से किया जाना चाहिए। जब नेता कीर्तन कर रहा हो, तब सामूहिक रूप से बीच में “चैतन्य!”, “नित्यानंद!”, “हरे हरे!” आदि बोलने को प्रोत्साहित नहीं किया जाता।

15. आरती-कीर्तन के अंत की ओर विग्रहों के नामों का कीर्तन वैकल्पिक है, क्योंकि प्रेम-ध्वनि प्रार्थनाओं के दौरान उनका गुणगान किया जा सकता है।

16. आरती-कीर्तन के अंत में प्रेम-ध्वनि मंत्रों का पाठ किया जाना चाहिए।

मंगल आरती

1. मंगल आरती के दौरान “प्रातःकालीन धुन” गाई जानी चाहिए।

वाद्ययंत्र

1. वाद्ययंत्रों को कीर्तन का सहयोग करना चाहिए और कभी भी कीर्तन की ध्वनि पर हावी नहीं होना चाहिए। कीर्तन सदैव सुनाई देना चाहिए।

2. वाद्ययंत्र बजाने वालों को वाद्ययंत्रों को ऊँचे स्वर में और शक्तिशाली ढंग से, तथा धीमे और मधुर ढंग से, दोनों प्रकार से बजाने की कला सीखनी चाहिए।

3. मृदंग वादकों को परंपरा के अनुसार प्रामाणिक ताल बजाने की आकांक्षा रखनी चाहिए। आधुनिक नृत्य-संगीत आदि से लिए गए आधुनिक रूपांतरणों से बचना चाहिए।

4. कीर्तनों और आरती के दौरान निम्नलिखित वाद्ययंत्र बजाए जाने चाहिए: मृदंग और करताल। व्हॉम्पर्स और घंटा (गॉन्ग) भी बजाए जा सकते हैं।

5. आरती-कीर्तन प्रेम-ध्वनि मंत्रों के कीर्तन के साथ समाप्त होता है।

6. आरती-कीर्तनों के बाद स्थानीय प्रबंधन दल की स्वीकृति से अतिरिक्त वाद्ययंत्र (हारमोनियम आदि) जोड़े जा सकते हैं।

7. यद्यपि भक्तों को विग्रहों की प्रसन्नता के लिए वाद्ययंत्रों को सुंदर ढंग से बजाने हेतु उनका अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, किंतु मंदिर-कक्ष इसके लिए उपयुक्त स्थान नहीं है। अभ्यास मंदिर-कक्ष के बाहर किया जाना चाहिए।

8. मृदंग की ध्वनि अन्य वाद्ययंत्रों से दबनी नहीं चाहिए। इसलिए, विभिन्न ड्रम और अन्य वाद्ययंत्र, जो मृदंगों और कीर्तन की ध्वनि को दबा देते हैं, प्रोत्साहित नहीं किए जाते।

9. अत्यधिक ऊँची आवाज़ वाले ड्रमों से जुड़े स्वास्थ्य-संबंधी पहलू अनिवार्य विचारणीय विषय हैं, क्योंकि कुछ भक्तों को माइग्रेन और यहाँ तक कि कानों की स्थायी क्षति भी हो जाती है।

गायन

1. आलाप एक शास्त्रीय हिंदुस्तानी संगीत-तकनीक है, जिसमें मंत्र को लंबा खींचा जाता है और अतिरिक्त अलंकरण जोड़े जाते हैं। श्रील प्रभुपाद की शारीरिक उपस्थिति के समय इस्कॉन के कीर्तन में इस तकनीक का उपयोग नहीं किया जाता था। आरती-कीर्तनों के दौरान आलाप सामान्यतः उपयुक्त नहीं है। आरती-कीर्तनों के अतिरिक्त, स्थानीय प्रबंधन की स्वीकृति से इसकी अनुमति दी जा सकती है।

2. जो सक्षम हों, उन्हें “Rama” का उच्चारण जैसा लिखा है वैसा ही करना चाहिए, “Ramo” नहीं।

3. वाद्ययंत्र बजाने वालों सहित सभी को प्रत्युत्तर में गाना भी चाहिए, क्योंकि सामूहिक कीर्तन ही कीर्तन का सार है।

ध्वनि-व्यवस्था (साउंड सिस्टम)

4. ध्वनि-व्यवस्था को मध्यम आवाज़ पर रखा जाना चाहिए। अधिक ऊँची आवाज़ बेहतर नहीं है। 85 dBA एक उचित स्तर है।

5. 2014 का जीबीसी प्रस्ताव देखें: 313: ध्वनि-व्यवस्था दिशानिर्देश: https://docs.google.com/document/d/1tAiBDMTinpnKf9jWVqer0prTequqp-M7eaBHZtANZ5s/edit?usp=sharing

6. कीर्तनों के दौरान केवल एक माइक्रोफ़ोन के उपयोग की अनुशंसा की जाती है।

7. सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण साइलेंट मोड में होने चाहिए या व्यक्तिगत रूप से सुनने के लिए हेडफ़ोन से जुड़े होने चाहिए।

नृत्य

1. नृत्य पारंपरिक गौड़ीय वैष्णव शैली में शालीन होना चाहिए। स्वीकृत नृत्यों में स्वामी स्टेप, आगे-पीछे चलना और उछलना शामिल हैं, किंतु ये इन्हीं तक सीमित नहीं हैं।

2. प्रतिभागियों को सदैव विग्रह की ओर मुख करने का प्रयास करना चाहिए।

सुरक्षित नृत्य

1. नृत्य से प्रतिभागियों की शारीरिक सुरक्षा ख़तरे में नहीं पड़नी चाहिए।

2. भक्तों को हवा में उठाने से चोटें लग सकती हैं और यह उपयुक्त भाव नहीं भी हो सकता।

3. घूमना (चक्कर लगाना) सावधानी से किया जाना चाहिए।

विग्रह

1. सामुदायिक भक्तों द्वारा मंदिर में लाए जाने वाले विग्रहों के साथ विग्रह-आराधना मंत्रालय द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार सम्मान और सावधानी से व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्हें हिलाया-डुलाया, ऊपर-नीचे उछाला या गोल-गोल घुमाया नहीं जाना चाहिए।

411.02: इस्कॉन हरिनाम संकीर्तन मंत्रालय: कीर्तन के मानक

[शीर्षक] – मंदिर कीर्तन दिशानिर्देश इन्फ़ोग्राफ़िक — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – वक्तव्य [पारित होने की तिथि] – 23 फ़रवरी, 2025

जबकि इस्कॉन कीर्तन मंत्रालय के अधिदेश में कीर्तन दिशानिर्देशों को लागू करना शामिल है।

जबकि उन मंदिर कीर्तन दिशानिर्देशों को संप्रेषित करने के एक प्रभावी साधन में इस्कॉन मंदिर-कक्षों में या उनके निकट एक इन्फ़ोग्राफ़िक लगाना शामिल है

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

इस्कॉन कीर्तन मंत्रालय 1 अगस्त, 2025 तक मंदिर कीर्तन दिशानिर्देशों को अपनी वेबसाइट पर एक इन्फ़ोग्राफ़िक के रूप में उपलब्ध कराएगा और उसका लिंक लीडरशिप डिस्कशन्स ईमेल सम्मेलन पर प्रसारित करेगा। इस्कॉन केंद्रों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे 1 सितंबर, 2025 तक मंदिर कीर्तन दिशानिर्देशों को मुद्रित करके इस्कॉन मंदिर-कक्षों में या उनके निकट लगाएँ।

414.01: संन्यास सेवा मंत्रालय: नीति-पुस्तिका

[शीर्षक] – संन्यास मूल्यांकन और स्वीकृति: संशोधन — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – शासी विधि [पारित होने की तिथि] – 23 फ़रवरी, 2025

जबकि प्रस्ताव 57/1988 में कहा गया है:

“कि किसी ब्रह्मचारी पर संन्यास के लिए तभी विचार किया जाए जब उसने वास्तव में कम से कम दस वर्षों तक अपने व्रतों का कड़ाई से पालन किया हो और वह कम से कम चालीस वर्ष का हो। असाधारण मामलों में, जीबीसी निकाय के 2/3 बहुमत के मत से किसी व्यक्ति को चालीस वर्ष की आयु से पहले संन्यास प्रदान किया जा सकता है। 50 वर्ष की आयु में संन्यास लेने के लिए व्यक्ति को दो वर्ष तक प्रतीक्षा-सूची में रहना होगा; 45 पर तीन वर्ष; 40 पर चार वर्ष, और 35 पर पाँच वर्ष”।

जबकि उम्मीदवारों के मूल्यांकन की विधियाँ, उनसे अपेक्षाएँ, प्रशिक्षण के साधन, और संन्यास लेने की तत्परता का आकलन, संन्यास मंत्रालय के अनुभव के अनुसार विकसित हो रहे हैं;

जबकि वर्तमान व्यवस्था में संशोधन करके संघर्षों से बचा जा सकता है;

जबकि वर्तमान व्यवस्था में संशोधन करके जीबीसी स्तर पर समय और ऊर्जा की बचत की जा सकती है;

जबकि प्रक्रिया में उपलब्धियों को सम्मिलित करके उम्मीदवारों को श्रील प्रभुपाद के मिशन के लिए अधिक मूल्यवान सेवा अर्पित करने हेतु प्रेरित किया जा सकता है

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

प्रस्ताव 57/1988 को निम्नलिखित से प्रतिस्थापित किया जाए:

संन्यास मंत्रालय की आधिकारिक नीति निम्नलिखित है:

1. संन्यास मंत्रालय आवेदकों के गुणों और उपलब्धियों का मूल्यांकन करेगा और इस प्रकार यह निर्धारित करेगा कि कोई भक्त संन्यास लेने हेतु संभवतः “संन्यास उम्मीदवार” बनने के लिए “संभावित उम्मीदवार” बन सकता है या नहीं।

ऐसे गुणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं, किंतु ये इन्हीं तक सीमित नहीं हैं:

• अधिकारियों के साथ सहयोग।

• “विविधता में एकता” की अवधारणा की व्यावहारिक समझ प्रदर्शित करना।

• विभिन्न स्तरों के लोगों और भक्तों के समक्ष कृष्णभावनामृत प्रस्तुत करने की, तथा कृष्णभावनामृत के प्रति दूसरों की प्रतिबद्धता के स्तर को प्रभावी ढंग से बढ़ाने की क्षमता।

• अनुकरणीय साधना प्रदर्शित करना

• श्रील प्रभुपाद द्वारा प्रस्तुत भगवान चैतन्य महाप्रभु के दर्शन और मिशन की स्पष्ट समझ होना।

• जो उपदेश देता है उसका स्वयं आचरण करने की क्षमता और निष्ठा।

• सभी स्तरों के भक्तों और अधिकारियों के साथ प्रभावी ढंग से संवाद करने की क्षमता।

उपलब्धियों में निम्नलिखित शामिल हो सकती हैं, किंतु ये इन्हीं तक सीमित नहीं हैं:

• बिना अधिक बाहरी सहायता के एक प्रचार-क्षेत्र का निर्माण करने, उसका विस्तार करने और उसे बनाए रखने की क्षमता प्रदर्शित करना, और इस प्रकार आत्मनिर्भरता दिखाना।

• कृष्णभावनामृत के सभी स्तरों के भक्तों के बीच सहयोग का वातावरण बनाना।

• स्वास्थ्य, प्रचार, साधना और भक्तों के साथ संबंधों का संतुलित जीवन जीना।

2. संन्यास लेने के योग्य होने के लिए उम्मीदवार की आयु कम से कम 40 वर्ष होनी चाहिए।

3. प्रत्येक भक्त को “संभावित संन्यास उम्मीदवार” के रूप में न्यूनतम एक वर्ष के लिए पुष्ट किया जाएगा।

4. जब कोई संभावित उम्मीदवार योग्य पाया जाता है, तो वह एक वर्ष के लिए संन्यास उम्मीदवार बन सकता है।

5. उस एक वर्ष के बाद, संन्यास उम्मीदवार की संन्यास लेने के लिए अनुशंसा की जा सकती है।

प्रक्रिया:

1. टीम फ़ॉर असेसिंग संन्यास कैंडिडेट्स (TASC – संन्यास उम्मीदवार मूल्यांकन दल) समिति वर्ष में एक बार संन्यास के लिए आवेदन स्वीकार करती है।

2. स्वीकृति के बाद, आवेदकों के सहायक दस्तावेज़ों की समीक्षा सचिवों द्वारा की जाती है, ताकि संन्यास मंत्रालय के दिशानिर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके।

3. आवेदन-सचिव द्वारा एक प्री-सबमिट (पूर्व-प्रस्तुति) प्रक्रिया आरंभ की जाती है, जिसमें संन्यास मंत्रालय उन विभिन्न भक्तों से प्रतिक्रिया प्राप्त करता है जिनका उम्मीदवार ने आवेदन में संदर्भ के रूप में उल्लेख किया है।

4. TASC विभिन्न भक्तों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर उम्मीदवार का मूल्यांकन करती है, और TASC उम्मीदवार से किसी श्लोक पर कक्षा देने का अनुरोध भी करती है, जिसे TASC के सदस्य भी सुनते हैं।

5. इसके बाद TASC के सदस्य चर्चा करते हैं कि उसे संभावित उम्मीदवार के रूप में स्वीकार किया जाए या पात्रता के और प्रमाण आवश्यक हैं।

6. संभावित संन्यास उम्मीदवार के रूप में स्वीकार किए जाने के बाद, संन्यास मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार TASC द्वारा उम्मीदवार के कर्तव्य और प्रशिक्षण निर्धारित किए जाते हैं।

7. TASC सभी नव-स्वीकृत संभावित संन्यास उम्मीदवारों की एक वार्षिक सूची संन्यास स्थायी समिति (संन्यास स्टैंडिंग कमेटी) को प्रस्तुत करती है।

8. संभावित संन्यास उम्मीदवार न्यूनतम एक वर्ष तक TASC, TSCS (टीम फ़ॉर सर्विंग कैंडिडेट्स ऑफ़ संन्यास – संन्यास उम्मीदवार सेवा दल) और संन्यास मिशन समिति द्वारा निर्धारित सभी कर्तव्यों और कार्यों को पूरा करते हैं।

9. प्रत्येक वर्ष के अंत में, पर्याप्त सुधार के लिए संन्यास मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए, उनकी प्रशिक्षण-अवधि की समीक्षा की जाती है और, यदि आवश्यक हो, TASC द्वारा आवश्यक समझे जाने पर उसका नवीनीकरण किया जाता है।

10. TASC संभावित संन्यास उम्मीदवारों के प्रदर्शन की समीक्षा करती है और उनकी अनुशंसा करने वाले जीबीसी, गुरु, संन्यास मार्गदर्शकों (मेंटर) और भावी संन्यास गुरुओं से प्राप्त प्रतिक्रिया, यात्रा-रिपोर्टों, मिशन-रिपोर्टों, संन्यास कॉलेज आदि के आधार पर उन्हें सुधार के लिए प्रतिक्रिया प्रदान करती है।

11. TASC के मार्गदर्शन का पालन न करने पर एक चेतावनी दी जाती है, उसके बाद दूसरी चेतावनी, और अंततः संभावित संन्यास उम्मीदवारों की सूची से हटा दिया जाता है।

12. संन्यास स्थायी समिति TASC के परामर्श के आधार पर या अपने स्वयं के साधारण बहुमत के निर्णय से किसी भी समय किसी संभावित उम्मीदवार को हटाने का अधिकार सुरक्षित रखती है।

13. जब TASC संभावित संन्यास उम्मीदवार की समग्र प्रगति से संतुष्ट हो जाती है, तब उसे उम्मीदवार के रूप में स्वीकार किए जाने के लिए संन्यास स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तावित किया जाता है, जो फिर 2/3 बहुमत से मतदान करती है।

14. संन्यास उम्मीदवारों की एक सूची अगली वार्षिक आम बैठक में जीबीसी के समक्ष उनके मतदान के लिए प्रस्तुत की जाती है, जिसमें न्यूनतम अनुशंसित प्रतीक्षा-अवधि एक वर्ष होती है।

15. जीबीसी को साधारण बहुमत के मत से प्रतीक्षा-अवधि को माफ़ करने या बढ़ाने का अधिकार है।

436.04: गुरु सर्विसेज़ कमेटी: नीति-पुस्तिका

[शीर्षक] – गुरु सर्विसेज़ कमेटी की नीति-पुस्तिका की स्वीकृति — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – वक्तव्य [पारित होने की तिथि] – 23 फ़रवरी, 2025

जबकि इस्कॉन विधि में वर्तमान में इस्कॉन गुरुओं के विरुद्ध शिकायतों के निपटान पर कोई व्यापक वक्तव्य नहीं है;

जबकि गुरु सर्विसेज़ कमेटी ने एक गुरु सर्विसेज़ नीति-पुस्तिका का प्रारूप तैयार किया है और 8 दिसंबर, 2022 को उसे स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया है

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

कि संलग्न गुरु सर्विसेज़ नीति-पुस्तिका को गुरु सर्विसेज़ कमेटी द्वारा इस्कॉन गुरुओं के विरुद्ध शिकायतों से निपटने की कार्यप्रणाली के रूप में स्वीकृत किया जाता है।

441.02: वैष्णव स्मारक स्थायी समिति: नियम

[शीर्षक] – मायापुर में दिवंगत श्रील प्रभुपाद-शिष्यों के लिए स्मारक-दीवार — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – शासी विधि [पारित होने की तिथि] – 23 फ़रवरी, 2025

जबकि समय बीतने के साथ, और भक्तों के वृद्ध होने तथा देह त्यागने के कारण, यह आवश्यक है कि इस्कॉन के लिए यथाशीघ्र एक वैष्णव स्मारक नीति स्थापित की जाए;

जबकि यद्यपि दिवंगत वैष्णवों के सम्मान हेतु एक मानक नीति का अध्ययन और स्थापना करने तथा दिवंगत वैष्णवों के लिए उपयुक्त स्मारक के प्रकार का निर्धारण करने के लिए जीबीसी के अधिदेश रहे हैं, फिर भी अब तक जीबीसी की ओर से इस्कॉन समुदाय के लिए कोई समेकित नीति या स्पष्ट दिशा नहीं है;

जबकि यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि सामान्यतः वैष्णवों के लिए दाह-संस्कार ही प्रचलित नियम है

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी मायापुर प्रबंधन को निर्देश देती है कि वह कृष्णकृपामूर्ति ए.सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद के दिवंगत शिष्यों के सम्मान में एक स्मारक-दीवार की व्यवस्था करे।

श्रील प्रभुपाद का कोई भी शिष्य इन स्मारक-दीवारों पर एक पट्टिका द्वारा स्मरण किए जाने का पात्र होगा। पट्टिका पर दिवंगत भक्त का नाम, श्रील प्रभुपाद द्वारा उन्हें दीक्षा दिए जाने की तिथि (कम से कम वर्ष), और इस संसार से उनके प्रयाण की तिथि (कम से कम वर्ष) अंकित होगी। मायापुर प्रबंधन को इस स्मारक-दीवार का वित्तपोषण करने का निर्देश दिया जाता है।

441.03: वैष्णव स्मारक स्थायी समिति: दिशानिर्देश

[शीर्षक] – विश्व भर के इस्कॉन केंद्रों में दिवंगत भक्तों के लिए स्मारक-दीवारें — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – दिशानिर्देश [पारित होने की तिथि] – 23 फ़रवरी, 2025

जबकि समय बीतने के साथ, और भक्तों के वृद्ध होने तथा देह त्यागने के कारण, यह आवश्यक है कि इस्कॉन के लिए यथाशीघ्र एक वैष्णव स्मारक नीति स्थापित की जाए;

जबकि यद्यपि दिवंगत वैष्णवों के सम्मान हेतु एक मानक नीति का अध्ययन और स्थापना करने तथा दिवंगत वैष्णवों के लिए उपयुक्त स्मारक के प्रकार का निर्धारण करने के लिए जीबीसी के अधिदेश रहे हैं, फिर भी अब तक जीबीसी की ओर से इस्कॉन समुदाय के लिए कोई समेकित नीति या स्पष्ट दिशा नहीं है;

जबकि यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि सामान्यतः वैष्णवों के लिए दाह-संस्कार ही प्रचलित नियम है

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

इस्कॉन केंद्रों (जहाँ संपत्ति इस्कॉन के स्वामित्व में है) को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे अपने विवेकानुसार, उन मंदिरों में सम्मानपूर्वक सेवा कर चुके दिवंगत भक्तों की स्मृति में एक स्मारक-दीवार के लिए स्थान आवंटित करें।

इनमें से प्रत्येक भक्त को स्मारक-दीवार पर लगाई गई एक पट्टिका द्वारा सम्मानित किया जाएगा। पट्टिका पर दिवंगत भक्त का नाम, यदि उन्हें दीक्षा मिली हो तो दीक्षा की तिथि (कम से कम वर्ष), इस संसार से उनके प्रयाण की तिथि (कम से कम वर्ष) अंकित होनी चाहिए, और उस पर एक चित्र भी हो सकता है। प्रत्येक मंदिर के संबंधित प्रबंधन से इस स्मारक-दीवार का वित्तपोषण करने का अनुरोध किया जाता है।

442.01: जीबीसी एग्ज़िक्यूटर्स प्रॉपर्टी ओवरसाइट कमेटी: समिति

[शीर्षक] – जीबीसी एग्ज़िक्यूटर्स एंड प्रॉपर्टी ओवरसाइट कमेटी (जीबीसी निष्पादक एवं संपत्ति निरीक्षण समिति) का अधिदेश

(GEPOC) – 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक (AGM) [श्रेणी] – शासी विधि [पारित होने की तिथि] – 23 फ़रवरी, 2025

जबकि जीबीसी ने, अपने सदस्यों के बीच उठाई गई चिंताओं पर कार्यवाही करते हुए, जीबीसी एग्ज़िक्यूटर्स प्रॉपर्टी एंड ओवरसाइट कमेटी (GEPOC) के अधिदेश की, और विशेष रूप से उसकी अधिकार-अनुसूची (शेड्यूल ऑफ़ अथॉरिटी) की, समीक्षा की, जो इस्कॉन में संपत्ति-संरक्षण को पुनर्जीवित करने के लिए 2022 के एक जीबीसी प्रस्ताव में स्थापित की गई थी;

जबकि अधिकार-अनुसूची, जो इस्कॉन की संपत्ति-संरक्षण में GEPOC की भूमिका को परिभाषित करती है, वर्तमान में GEPOC को जीबीसी की स्वीकृति लिए बिना भारत से बाहर की संपत्तियों की बिक्री को स्वीकृति देने का अधिकार देती है;

जबकि यह अनिवार्य है कि जीबीसी, इस्कॉन के सर्वोच्च प्रबंधकीय प्राधिकरण के रूप में, भारत से बाहर की इस्कॉन संपत्तियों के प्रस्तावित बंधक (मॉर्गेज), उनके आधार पर ऋण, बिक्री, हस्तांतरण, भार-ग्रस्तता, निपटान या अन्य-संक्रामण को स्वीकृत या अस्वीकृत करने का अधिकार रखे।

(ध्यान दें कि श्रील प्रभुपाद की वसीयत में इस्कॉन संपत्तियों के संबंध में स्पष्ट रूप से “…बंधक रखी जाएँ, उनके आधार पर ऋण लिया जाए, बेची जाएँ, हस्तांतरित की जाएँ, या किसी भी प्रकार से भार-ग्रस्त की जाएँ, निपटाई जाएँ, या अन्य-संक्रामित की जाएँ…” का उल्लेख है।)

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

भारत से बाहर किसी भी इस्कॉन संपत्ति की बिक्री, क्रय या बंधक के संबंध में अधिकार-अनुसूची को एतद्द्वारा निम्नानुसार अद्यतन और संशोधित किया जाता है:

(a) इस्कॉन ग्लोबल प्रॉपर्टी ऑफ़िस (IGPO), जो केवल GEPOC को, अपने प्रत्यक्ष निरीक्षण प्राधिकरण को, रिपोर्ट करता है, इस्कॉन संपत्तियों के किसी भी संभावित बंधक, उनके आधार पर ऋण, बिक्री, हस्तांतरण, भार-ग्रस्तता, निपटान या अन्य-संक्रामण का प्रस्ताव समीक्षा के लिए GEPOC के समक्ष लाएगा।

(b) GEPOC ऐसी संपत्ति के संभावित बंधक, उसके आधार पर ऋण, बिक्री, हस्तांतरण, भार-ग्रस्तता, निपटान या अन्य-संक्रामण पर IGPO की रिपोर्ट पर कार्यवाही और समीक्षा करेगी, और अपनी अनुशंसाओं को एक रिपोर्ट में जीबीसी के समक्ष उसकी स्वीकृति या अस्वीकृति के लिए प्रस्तुत करेगी।

(c) किसी भी संदेह से बचने के लिए, IGPO और GEPOC इस्कॉन संपत्तियों के किसी भी क्रय पर कार्यवाही नहीं करेंगे।

443.01: जीबीसी उत्तराधिकार समिति: समिति

[शीर्षक] – उत्तराधिकार समिति की स्थापना — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – प्रशासनिक आदेश [पारित होने की तिथि] – 16 फ़रवरी, 2025

जबकि उत्तराधिकार-योजना पूरे इस्कॉन नेतृत्व में एक आवश्यकता है, जिसमें, किंतु इन्हीं तक सीमित नहीं,

जीबीसी शामिल है;

जबकि जीबीसी में योग्य नए सदस्य हों, इसके लिए नेतृत्व के सभी स्तरों पर उत्तराधिकार-योजना आवश्यक है;

जबकि जीबीसी ने पुणे में 2023 की मध्यावधि आम बैठक में उत्तराधिकार के विषयों पर चर्चा की;

जबकि एक लिखित उत्तराधिकार प्रोटोकॉल सुचारु परिवर्तन सुनिश्चित करेगा और इस्कॉन नेतृत्व के सभी स्तरों पर आने वाले पीढ़ीगत परिवर्तनों के लिए एक पूर्व-उदाहरण और संदर्भ-पुस्तिका होगा;

जबकि जीबीसी संगठनात्मक विकास समिति को एक उत्तराधिकार और संक्रमण रणनीति प्रस्तावित करने का कार्य सौंपा गया था, जिसमें कौशल के संरक्षण और संशोधित भूमिकाओं के विकल्पों सहित चरण-दर-चरण प्रक्रिया का विवरण हो;

जबकि यह जीबीसी के लिए था, किंतु इस रणनीति को इस्कॉन नेतृत्व के अन्य स्तरों तक विस्तारित करने में बुद्धिमत्ता है;

जबकि जीबीसी के एक सर्वेक्षण से पता चला कि कम से कम 11 जीबीसी सदस्य 5 वर्षों के भीतर सेवानिवृत्त होने का इरादा रखते हैं;

जबकि उत्तराधिकार-योजना को एक घटना नहीं, बल्कि एक यात्रा के रूप में देखा जाना चाहिए;

जबकि उत्तराधिकार समिति की नियुक्ति दुर्बल उत्तराधिकार-योजना के परिणामों को कम करने के लिए एक आवश्यक उपाय है;

जबकि सर्वोत्तम रणनीति भी विफल हो सकती है यदि किसी संगठन के पास विभिन्न स्तरों पर उचित क्षमताओं वाले नेताओं का समूह न हो

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

1. मूल रूप से 2014 के कार्यवृत्त में उल्लिखित उत्तराधिकार समिति को वरिष्ठ नेतृत्व के सभी स्तरों पर विकास में सहायता के लिए जीबीसी स्थायी समिति के रूप में स्वीकृत किया जाता है।

2. उत्तराधिकार समिति की प्रारंभिक सदस्यता में चैतन्य अवतारी दास और गौरांग दास (सह-संयोजक), भक्तिवैभव स्वामी, रासक्रीड़ा परायण दास, दीनशरण देवी दासी, देवकीनंदन दास (जुहू) और अनिरुद्ध दास होंगे।

3. कार्यों के और अधिक स्पष्ट होने पर अतिरिक्त प्रतिनिधियों को सम्मिलित करने के लिए सदस्यता का विस्तार किया जा सकता है।

समिति का अधिदेश निम्नलिखित के लिए परामर्शदात्री भूमिका में सेवा करना है:

1. इस्कॉन भक्तों को नेतृत्व-पदों के लिए पहचानने, भर्ती करने और तैयार करने हेतु इस्कॉन संस्था के साथ सर्वोत्तम पद्धतियाँ साझा करना।

2. नेतृत्व के सुचारु परिवर्तन के लिए तंत्र साझा करना।

3. पद छोड़ने वाले नेताओं को अपने उत्तराधिकारी को सभी प्रकार का सकारात्मक सहयोग देने में मार्गदर्शन के लिए प्रभावी प्रक्रियाएँ विकसित करना।

4. विस्तृत निकास-साक्षात्कारों (एग्ज़िट इंटरव्यू) के लिए सामग्री उपलब्ध कराना और उस डेटा का निरंतर सुधार के लिए उपयोग करना।

5. नव-नियुक्त इस्कॉन नेताओं को प्रशिक्षित करने, सहयोग देने और उन्हें अभिविन्यास (ओरिएंटेशन) प्रदान करने में सहायक व्यवस्थाएँ प्रस्तुत करना।

6. जीबीसी नामांकन समिति के सहयोग से कार्य करना, जो विशेष रूप से जीबीसी के लिए उम्मीदवारों को नामित करने के कार्य में संलग्न है।

450.03: इस्कॉन केंद्रीय बाल संरक्षण कार्यालय: बाल संरक्षण निरीक्षण समिति (CPOC)

[शीर्षक] – बाल संरक्षण निरीक्षण समिति (CPOC) — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – वक्तव्य [पारित होने की तिथि] – 21 फ़रवरी, 2025

जबकि जीबीसी स्वीकार करती है कि 3 जनवरी, 2025 के उसके प्रस्ताव पर विश्व भर के क्षेत्रीय शासी निकायों (RGB) और क्षेत्रीय बाल संरक्षण कार्यालयों की मिश्रित प्रतिक्रिया रही है। हम यह भी स्वीकार करते हैं कि सभा (SABHA) ने, जैसा करने का उसे अधिकार है, आधिकारिक रूप से प्रस्ताव लौटा दिया और जीबीसी से उस पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया

जबकि सभा, RGB और स्थानीय CPO की चिंताओं की समीक्षा करने के बाद, हम निम्नलिखित अतिरिक्त प्रस्ताव द्वारा अपने पिछले 3 जनवरी के निर्णय को संशोधित करते हैं

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

न्याय मंत्री 3-9 महीने की अवधि के लिए संक्रमणकालीन ICPO निदेशक के रूप में सेवा करेंगे।

वर्तमान ICPO निदेशक द्वारा संक्रमणकालीन ICPO निदेशक को एक व्यापक कार्यभार-हस्तांतरण प्रक्रिया संपन्न की जाएगी। इस प्रक्रिया में, अपूर्ण केस-फ़ाइलों पर विशेष ध्यान देते हुए, सभी केस-फ़ाइल नोट्स, स्थिति-रिपोर्टों, तथा पैनलिस्टों और जाँचकर्ताओं की संपर्क-जानकारी का हस्तांतरण शामिल होगा, किंतु यह इन्हीं तक सीमित नहीं होगा। इसके अतिरिक्त, निरंतरता और निरीक्षण सुनिश्चित करने के लिए, सभी संबंधित डेटाबेस—जिनमें शिकायतें, अपराधी, बाल संरक्षण दल (CPT) और पैनलिस्ट शामिल हैं—वर्तमान ICPO निदेशक द्वारा संक्रमणकालीन ICPO निदेशक को पूर्ण रूप से हस्तांतरित किए जाने अनिवार्य हैं।

इस संक्रमणकाल के दौरान, बाल संरक्षण निरीक्षण समिति (CPOC) को निर्देश दिया जाता है कि वह:

1. क्षेत्रीय CPO निदेशकों, RGB और अन्य हितधारकों के साथ और परामर्श करे।

2. संक्रमणकालीन ICPO निदेशक और संबंधित क्षेत्रीय CPO निदेशकों के परामर्श से, 1 मार्च 2025 के बाद सूचित मामलों का उपयोग करते हुए, नए उन्नत दृष्टिकोण को मौजूदा ICPO मॉडल और दिशानिर्देशों के समानांतर लागू करे, ताकि उन्नत मॉडल का परीक्षण किया जा सके, समस्याओं की पहचान की जा सके और मॉडल को और परिष्कृत किया जा सके।

3. व्यावसायिक जाँचकर्ताओं; विभिन्न क्षेत्राधिकारों से जुड़े मुद्दों; विभिन्न क्षेत्रों में दुर्व्यवहार के प्रति असंगत मानकों, परिभाषाओं और प्रतिक्रिया; क्षेत्रीय मामला-समीक्षा में पक्षपात; मौजूदा CPO नीतियों और दिशानिर्देशों के संशोधन/अद्यतन; वित्तपोषण; आदि के संबंध में उठाए गए मुद्दों पर विशेष ध्यान दे।

4. जहाँ क्षेत्रीय CPO नहीं हैं, वहाँ उनकी स्थापना करे और, जहाँ आवश्यक हो, क्षेत्रीय CPO के बीच सहयोगात्मक संबंध बनाए तथा आवश्यकतानुसार संसाधन उपलब्ध कराए।

5. उन्नत दृष्टिकोण को लागू करने के लिए मौजूदा CPO की तत्परता के संबंध में, परीक्षण-अवधि की प्रतिक्रिया और परिणाम जीबीसी को 30 अक्टूबर, 2025 तक प्रदान करे।

451.01: इस्कॉन वैश्विक संकट प्रतिक्रिया दल (IGCRT): दल की स्थापना

[शीर्षक] – इस्कॉन वैश्विक संकट प्रतिक्रिया दल (IGCRT) की स्थापना — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – प्रशासनिक आदेश [पारित होने की तिथि] – 16 फ़रवरी, 2025

जबकि इस्कॉन एक वैश्विक संगठन है, जिसके मंदिर, प्रतिष्ठित विग्रह, सामुदायिक और मंदिर-निवासी भक्त, परियोजनाएँ और कार्यक्रम, तथा अन्य परिसंपत्तियाँ विश्व के लगभग प्रत्येक देश में हैं;

जबकि अप्रत्याशित घटनाओं और संकटों में अग्नि, बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक घटनाएँ; नैतिक और आचारिक उल्लंघनों सहित नेतृत्व-संबंधी मुद्दे; तकनीकी विफलताएँ; वित्तीय प्रणालियों का ध्वस्त होना; कानूनी या नियामक मुद्दे; राजनीतिक उथल-पुथल; और भी बहुत कुछ शामिल हो सकते हैं;

जबकि संकट इस्कॉन की वित्तीय स्थिरता, संगठनात्मक अखंडता और वैश्विक प्रतिष्ठा के लिए ख़तरा बन सकते हैं, और बन चुके हैं, तथा भक्तों की श्रद्धा के ह्रास का कारण बन सकते हैं;

जबकि केवल इस्कॉन प्रबंधन दलों के पास ऐसे संकटों के लिए तैयारी करने और उनका सामना करने का कौशल या विशेषज्ञता नहीं हो सकती, न ही “सुलगते संकटों” से निपटने की क्षमता (परिशिष्ट एक देखें);

जबकि संकटों का निपटान ऐसे दलों द्वारा किया जाना आवश्यक है जिन्हें इस्कॉन नेतृत्व द्वारा वैश्विक जीबीसी तथा RGB/ज़ोनल/क्षेत्रीय स्तरों पर, और यथोचित रूप से स्थानीय स्तरों पर, पहले से स्थापित किया गया हो;

जबकि अपने स्थान, प्रभाव और गंभीरता के आधार पर, संकटों का प्रबंधन स्थानीय, क्षेत्रीय या वैश्विक दलों द्वारा किया जाना चाहिए, बशर्ते वे उचित रूप से प्रशिक्षित और समन्वित हों;

जबकि विशेष रूप से अप्रत्याशित या अनपेक्षित घटनाओं में अक्सर एक समर्पित, प्रशिक्षित और समन्वित नेतृत्व-दल द्वारा तत्काल प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है;

जबकि इस्कॉन को सभी प्रकार के संकटों के लिए तैयारी करने और उनका सामना करने, दोनों के लिए एक व्यापक व्यवस्था की आवश्यकता है;

जबकि वैश्विक स्तर से आरंभ होने वाली संकट-प्रतिक्रिया व्यवस्था को पर्याप्त संसाधनों से युक्त, बहु-विषयक दल होना चाहिए, जो अपने दृष्टिकोण में पूर्व-सक्रिय हो और आवश्यकतानुसार प्रतिक्रिया देने के लिए सशक्त हो;

जबकि संगठनात्मक विकास समिति की एक उप-समिति ने (जिसमें जीबीसी विधि-परामर्शदाता, इस्कॉन संचार मंत्री, तीन बार सेवा दे चुके एक पूर्व जीबीसी कार्यकारी अध्यक्ष, और पूर्व जीबीसी कार्यकारी कार्यालय अध्यक्ष शामिल हैं) इस विषय का गहन अध्ययन किया है और अपना विश्लेषण प्रस्तुत किया है

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

1. एतद्द्वारा इस्कॉन वैश्विक संकट प्रतिक्रिया दल (IGCRT) का गठन किया जाता है। IGCRT जीबीसी निकाय के अधिकार के अधीन सेवा करेगा।

2. इसके सदस्य निम्नलिखित होंगे: a. स्थायी सदस्य: i. जीबीसी कार्यकारी समिति के अध्यक्ष, या वार्षिक रूप से नामित कोई अन्य जीबीसी ईसी सदस्य ii. निदेशक, जीबीसी कार्यकारी सचिवालय कार्यालय iii. वैश्विक संचार मंत्री iv. कार्यकारी सचिवालय कार्यालय (ESO) संचार निदेशक v. संकट अधिकारी vi. प्रशासनिक सहायक b. तदर्थ सदस्य i. जीबीसी जनरल काउंसल (GGC) ii. विशेषज्ञ सलाहकार, जिन्हें किसी विशेष संकट से निपटने के लिए आवश्यकतानुसार नियुक्त किया जाएगा

3. क्षेत्रीय शासी निकायों (RGB) और अन्य क्षेत्रीय, राष्ट्रीय तथा ज़ोनल शासी निकायों को दृढ़तापूर्वक परामर्श दिया जाएगा कि वे इस प्रस्ताव के पारित होने के दो वर्षों के भीतर, इसी प्रकार के प्रारूप का पालन करते हुए, क्षेत्रीय संकट प्रतिक्रिया दल स्थापित करें, जिसमें यह भी शामिल हो कि उस ज़ोन/क्षेत्र की देखरेख करने वाले जीबीसी सदस्य, साथ ही विधि-सलाहकार या निदेशक, संचार निदेशक और उपलब्ध अन्य विशेषज्ञ, संकट प्रतिक्रिया दल में अनिवार्य रूप से हों। यह अनुशंसा की जाती है कि व्यक्तिगत मंदिर यथोचित रूप से इसी प्रकार की संरचना वाले स्थानीय संकट प्रतिक्रिया दल स्थापित करें, अर्थात उनमें स्थानीय मंदिर अध्यक्ष, विधि-सलाहकार या निदेशक, संचार निदेशक और उपलब्ध अन्य संकट-विशेषज्ञ अनिवार्य रूप से शामिल हों।

4. किसी भी संकट की गंभीरता और भौगोलिक प्रभाव के आधार पर, संकट का निपटान वैश्विक, ज़ोनल या क्षेत्रीय संकट प्रतिक्रिया दल, या स्थानीय संकट प्रतिक्रिया दल द्वारा किया जाएगा। जब प्रतिक्रिया के क्षेत्राधिकार पर स्पष्टता आवश्यक हो, तब IGCRT के निर्णय सर्वोपरि होंगे।

5. संकट अधिकारी को ESO निदेशक द्वारा नामित किया जाएगा और IGCRT सदस्यों के बहुमत के मत से वार्षिक रूप से नियुक्त किया जाएगा। प्रारंभिक संकट अधिकारी यूके की माधवी-गोपी देवी दासी होंगी।

6. ESO निदेशक आवश्यकतानुसार वैश्विक और क्षेत्रीय संकट प्रतिक्रिया दलों के कार्य का समन्वय और सहयोग करेंगे।

(संपूर्ण विवरण पढ़ने के लिए, यहाँ क्लिक करें)

खंड 600: इस्कॉन आध्यात्मिक नेतृत्व

604.01: क्षेत्रीय प्रबंधन: क्षेत्रीय शासी निकाय

[शीर्षक] — रूसी RGB का गठन और मान्यता — 2024

[बैठक] – ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] – प्रशासनिक आदेश [पारित होने की तिथि] – 7 अगस्त, 2024

जबकि जीबीसी निकाय ने महाद्वीपीय समितियों की स्थापना को प्रोत्साहित किया है (जीबीसी प्रस्ताव 404/2002. क्षेत्रीय और महाद्वीपीय शासी निकाय);

जबकि एरिया जीबीसी मॉडल में, जिसमें तीन मंडल (स्फ़ीयर) हैं, रूस को एक ’क्षेत्र’ के रूप में नामित किया गया है;

जबकि रूसी जीबीसी सदस्य और अन्य नेता एक महाद्वीपीय शासन-समूह के रूप में कार्य करते आ रहे हैं, किंतु उन्होंने पहले क्षेत्रीय शासी निकाय के रूप में मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया था;

जबकि रूसी राष्ट्रीय परिषद (आधिकारिक रूप से रूस में कृष्णभावनामृत संघों के केंद्र की शासी परिषद के नाम से ज्ञात) एक RGB के निर्माण की रूपरेखा पर कार्य कर रही है

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी रूसी राष्ट्रीय परिषद के आवेदन को, संलग्न नियमों और विनियमों सहित, स्वीकार करती है और रूसी क्षेत्रीय शासी निकाय को आधिकारिक रूप से मान्यता देती है।

604.01: क्षेत्रीय प्रबंधन: क्षेत्रीय शासी निकाय

[शीर्षक] — अफ़्रीकी RGB का गठन और मान्यता — 2024

[बैठक] – ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] – प्रशासनिक आदेश [पारित होने की तिथि] – 4 सितंबर, 2024

जबकि इस्कॉन अफ़्रीका (दक्षिणी अफ़्रीका, पूर्वी अफ़्रीका और पश्चिमी अफ़्रीका) के नेताओं ने एक क्षेत्रीय शासी निकाय (RGB) स्थापित करने की आवश्यकता को पहचाना है;

जबकि ARGB जीबीसी और जीबीसी कार्यकारी समिति (EC) के साथ मुख्य संपर्क-सूत्र होगा, जिससे संचार और दक्षता में सुधार होगा;

जबकि अफ़्रीकी क्षेत्र में समग्र प्रचार-रणनीति के समन्वय को बढ़ाने की आवश्यकता है, जिसमें ग्रंथ-वितरण, क्षेत्र में आने वाले भक्तों और प्रचारकों का समन्वय, प्रचारकों और नेताओं के प्रशिक्षण और विकास का समन्वय (प्रत्यक्ष और ऑनलाइन), अफ़्रीका पर लागू इस्कॉन गवर्निंग बॉडी कमीशन (जीबीसी) की नीतियों, दिशानिर्देशों और प्रस्तावों के कार्यान्वयन के समन्वय को बढ़ाना, बाल संरक्षण और जाँच तथा अन्य सहक्रियात्मक कार्य शामिल हैं;

जबकि ARGB जहाँ उचित हो, जीबीसी विधि-निर्माण के लिए जीबीसी निकाय को अनुशंसाएँ करना चाहता है;

जबकि अफ़्रीका में कार्यरत किसी भी जीबीसी ज़ोनल सचिव (जीबीसी सदस्य) या अन्य इस्कॉन अधिकारी को उस क्षेत्र में इस्कॉन के मामलों से संबंधित विषयों पर अनुशंसाएँ करने से उद्देश्य की एक प्रबल भावना उत्पन्न होती है;

जबकि ARGB उत्तराधिकार और प्रतिभा-विकास सुनिश्चित करने के लिए, अफ़्रीकी RGB के उत्तरदायित्वों के निर्वहन हेतु जैसा आवश्यक समझे, समितियों आदि का गठन करेगा (जिनमें संन्यासी उम्मीदवारों, गुरु-नामांकनों, ज़ोनल पर्यवेक्षकों की जाँच और स्वीकृति शामिल है, किंतु यह केवल इन्हीं के लिए नहीं है);

जबकि ARGB अफ़्रीका के भीतर ऐसे किसी भी संघर्ष के समाधान में सहायता कर सकता है जो किसी एक अफ़्रीकी देश/ज़ोन के दायरे से बाहर हो। इसमें जीबीसी निकाय, ज़ोनल परिषदों, किसी भी इस्कॉन अधिकारी या निकाय, या व्यक्तियों द्वारा उसे भेजी गई क्षेत्रीय विषयों पर शिकायतों का निपटान शामिल है। और जहाँ आवश्यक और उचित हो, ऐसे निकाय के लिए इस्कॉन विधि के अंतर्गत अनुमत रूप में, अफ़्रीका में सेवारत इस्कॉन अधिकारियों और/या अन्य सदस्यों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करना भी;

जबकि ARGB का निर्माण प्रचार की योजना बनाने, सुविधा प्रदान करने और यहाँ तक कि प्रचार के विकास के लिए सीमा-पार सहायता में भी सुगमता प्रदान करता है;

जबकि ARGB की स्थापना उस मॉडल में सटीक बैठती है जो

इस्कॉन

के वैश्विक प्रबंधन के लिए विकसित किया जा रहा है

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी अफ़्रीका के लिए क्षेत्रीय शासी निकाय के गठन को, उसके संलग्न नियमों और विनियमों सहित, स्वीकृति देती है।

खंड 700: गुरु और शिष्य

702.03: इस्कॉन के आध्यात्मिक गुरु: दीक्षा गुरु

[शीर्षक] – दीक्षा-गुरु परियोजनाएँ स्थिति-पत्र — 2024

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – स्थिति-पत्र [पारित होने की तिथि] – 21 अगस्त, 2024

संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी “सिद्धांत और व्यवहार/दीक्षा-गुरु परियोजनाएँ” स्थिति-पत्र को स्वीकृति देती है।

702.03: इस्कॉन के आध्यात्मिक गुरु: दिशानिर्देश

[शीर्षक] – गुरु के उत्तरदायित्वों की परिभाषा — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – दिशानिर्देश [पारित होने की तिथि] – 23 फ़रवरी, 2025

जबकि गुरु की प्राथमिक भूमिका शास्त्र पर आधारित आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करना होनी चाहिए।

जबकि इस्कॉन में गुरु की भूमिका पर वर्तमान विधान में कहा गया है:

“गुरु वह है जो प्रकट शास्त्रों के आधार पर आध्यात्मिक ज्ञान का संचार करता है।” 404/1999

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी एतद्द्वारा पुनः पुष्टि करती है कि इस्कॉन में शिक्षा- या दीक्षा-गुरु की प्राथमिक भूमिका आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करना है। अपनी विशेषज्ञता और उत्तरदायित्व से बाहर के विषयों में, उन्हें परामर्श दिया जाता है कि वे भक्तों को उपयुक्त रूप से योग्य विशेषज्ञों से सलाह लेने के लिए निर्देशित करें।

702.09: इस्कॉन के आध्यात्मिक गुरु: दीक्षा-गुरु की सेवा आरंभ करने वाले भक्त

[शीर्षक] – नए दीक्षा गुरु — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – वक्तव्य [पारित होने की तिथि] – [विभिन्न]

जबकि 2024 के जीबीसी प्रस्ताव 702.02 ने भक्तों के अपने दीक्षा-गुरुओं की उपस्थिति में दीक्षा देने की प्रक्रिया को संशोधित किया;

जबकि जीबीसी ने निर्धारित किया है कि नीचे दिए गए छह भक्तों ने इन आवश्यकताओं को पूरा किया है

अतः यह संकल्प किया जाता है कि:

वसु श्रेष्ठ दास (JPS), दयावान स्वामी (RS), मणिबंध दास (NRS), मदनमोहन दास (MG), रेवती रमण दास (JPS), और चैतन्य अवतारी दास (JPS)

इस्कॉन

में दीक्षा-गुरु की सेवा आरंभ कर सकते हैं।

[इस्कॉन दीक्षा-गुरुओं की पूरी सूची देखने के लिए यहाँ क्लिक करें]

खंड 800: नियुक्तियाँ

802.01: जीबीसी पदाधिकारी और सदस्य: जीबीसी पदाधिकारी

[शीर्षक] — जीबीसी पदाधिकारी — 2025 [बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य-आदेश [पारित होने की तिथि] — 14 फ़रवरी, 2025

संकल्प किया जाता है कि:

1. गोवर्धन दास (BCAIS) जीबीसी अध्यक्ष निर्वाचित किए जाते हैं

2. तपन मिश्र दास (BVKS) प्रथम उपाध्यक्ष निर्वाचित किए जाते हैं

3. मधु सेवित दास द्वितीय उपाध्यक्ष निर्वाचित किए जाते हैं

4. रेवती रमण दास (JPS) जीबीसी सचिव निर्वाचित किए जाते हैं

802.02: जीबीसी पदाधिकारी और सदस्य: व्यक्तिगत सदस्य-नियुक्तियाँ

[शीर्षक] — कृष्ण प्रेमरूप दास सहायक जीबीसी सदस्य के रूप में नियुक्त — 2025

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — वक्तव्य [पारित होने की तिथि] — 15 फ़रवरी, 2025

संकल्प किया जाता है कि:

कृष्ण प्रेमरूप दास (BSDS) को जर्मनिक यूरोप के लिए सहायक जीबीसी सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाता है।

[शीर्षक] — मथुरेश दास सहायक जीबीसी सदस्य के रूप में नियुक्त — 2025

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — वक्तव्य [पारित होने की तिथि] — 15 फ़रवरी, 2025

संकल्प किया जाता है कि:

मथुरेश दास (JPS) को एंडियन देशों के लिए सहायक जीबीसी सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाता है।

[शीर्षक] — प्रघोष दास पुनः जीबीसी सदस्य के रूप में नियुक्त — 2025

[बैठक] — ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] — वक्तव्य [पारित होने की तिथि] — 19 मार्च, 2025

जबकि जीबीसी कार्यकारी समिति को आयरलैंड, स्कैंडिनेविया और यूके के भक्तों से प्रघोष दास के पूर्ण जीबीसी सदस्य के रूप में अपने कर्तव्यों को पुनः ग्रहण करने के लिए निष्ठापूर्ण और प्रबल अनुरोध प्राप्त हुए हैं;

जबकि प्रघोष दास ने इसलिए, सेवा और सहयोग की भावना से, आयरलैंड, स्कैंडिनेविया और यूके के लिए जीबीसी ज़ोनल सचिव की सेवा के लिए पुनः प्रतिबद्ध होने पर सहमति दी है, और साथ ही इन ज़ोनों के लिए एक उत्तराधिकार-योजना विकसित करने के लिए स्वयं को प्रतिबद्ध किया है;

जबकि यद्यपि जीबीसी निकाय प्रघोष प्रभु के त्यागपत्र के आधारों से अवगत है, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि जीबीसी के निर्णय सामूहिक होते हैं और उचित विचार-विमर्श के बाद एक बार संकल्पित हो जाने पर, प्रत्येक जीबीसी सदस्य के पालन पर आधारित रहते हैं

अतः, यह संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी निकाय एतद्द्वारा प्रघोष प्रभु को आयरलैंड, स्कैंडिनेविया और यूनाइटेड किंगडम के लिए जीबीसी ज़ोनल सचिव के रूप में पुनः बहाल करता है।

802.03: जीबीसी पदाधिकारी और सदस्य: व्यक्तिगत सदस्यों के त्यागपत्र

[शीर्षक] — दीनशरण देवी दासी का त्यागपत्र — 2025

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य-आदेश [पारित होने की तिथि] — 8 मार्च, 2024

संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी दीनशरण देवी दासी का त्यागपत्र स्वीकार करती है। उनका त्यागपत्र 2025 की वार्षिक आम बैठक के समापन पर प्रभावी होगा।

[शीर्षक] — गिरिधारी स्वामी का त्यागपत्र — 2024

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — वक्तव्य [पारित होने की तिथि] — 8 मार्च, 2024

संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी गिरिधारी स्वामी का त्यागपत्र स्वीकार करती है।

802.04: जीबीसी पदाधिकारी और सदस्य: अवकाश पर व्यक्तिगत सदस्य

[शीर्षक] — रोमपाद स्वामी का अवकाश — 2025

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य-आदेश [पारित होने की तिथि] — 14 फ़रवरी, 2025

संकल्प किया जाता है कि:

रोमपाद स्वामी का अवकाश एक वर्ष और बढ़ाकर 14 फ़रवरी, 2026 तक किया जाता है।

802.04: जीबीसी पदाधिकारी और सदस्य: अवकाश पर व्यक्तिगत सदस्य

[शीर्षक] — वीरबाहु दास का अवकाश — 2024

[बैठक] — ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] — कार्य-आदेश [पारित होने की तिथि] — 13 नवंबर, 2024

संकल्प किया जाता है कि:

वीरबाहु दास को एतद्द्वारा एक वर्ष का अवकाश प्रदान किया जाता है। इस अवधि के भीतर, वीरबाहु दास अपने जीबीसी ज़ोन के लिए एक उत्तराधिकारी को नामित करेंगे।

802.05: जीबीसी पदाधिकारी और सदस्य: एमेरिटस बनने वाले व्यक्तिगत सदस्य

[शीर्षक] – भक्ति-भूषण स्वामी जीबीसी एमेरिटस के रूप में — 2025

[बैठक] – ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] – वक्तव्य [पारित होने की तिथि] – 4 सितंबर, 2024

संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी निकाय के प्रति उनकी दीर्घकालिक सेवा की मान्यता में, भक्ति-भूषण स्वामी को एतद्द्वारा जीबीसी एमेरिटस का दर्जा प्रदान किया जाता है।

[शीर्षक] – भक्तिमार्ग स्वामी जीबीसी एमेरिटस के रूप में — 2025

[बैठक] – ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] – वक्तव्य [पारित होने की तिथि] – 4 सितंबर, 2024

संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी निकाय के प्रति उनकी दीर्घकालिक सेवा की मान्यता में, भक्तिमार्ग स्वामी को एतद्द्वारा जीबीसी एमेरिटस का दर्जा प्रदान किया जाता है।

[शीर्षक] – गिरिधारी स्वामी जीबीसी एमेरिटस के रूप में — 2025

[बैठक] – ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] – वक्तव्य [पारित होने की तिथि] – 4 सितंबर, 2024

संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी निकाय के प्रति उनकी दीर्घकालिक सेवा की मान्यता में, गिरिधारी स्वामी को एतद्द्वारा जीबीसी एमेरिटस का दर्जा प्रदान किया जाता है।

[शीर्षक] – निरंजन स्वामी जीबीसी एमेरिटस के रूप में — 2025

[बैठक] – ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] – वक्तव्य [पारित होने की तिथि] – 4 सितंबर, 2024

संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी निकाय के प्रति उनकी दीर्घकालिक सेवा की मान्यता में, निरंजन स्वामी को एतद्द्वारा जीबीसी एमेरिटस का दर्जा प्रदान किया जाता है।

[शीर्षक] – राधानाथ स्वामी जीबीसी एमेरिटस के रूप में — 2025

[बैठक] – ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] – वक्तव्य [पारित होने की तिथि] – 4 सितंबर, 2024

संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी निकाय के प्रति उनकी दीर्घकालिक सेवा की मान्यता में, राधानाथ स्वामी को एतद्द्वारा जीबीसी एमेरिटस का दर्जा प्रदान किया जाता है।

[शीर्षक] – मालती देवी दासी जीबीसी एमेरिटस के रूप में — 2025

[बैठक] – ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] – वक्तव्य [पारित होने की तिथि] – 3 जनवरी, 2025

संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी निकाय के प्रति उनकी दीर्घकालिक सेवा की मान्यता में, मालती देवी दासी को एतद्द्वारा जीबीसी एमेरिटस का दर्जा प्रदान किया जाता है।

[शीर्षक] – दीनशरण देवी दासी जीबीसी एमेरिटस के रूप में — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – वक्तव्य [पारित होने की तिथि] – 23 फ़रवरी, 2025

संकल्प किया जाता है कि:

जीबीसी निकाय के प्रति उनकी दीर्घकालिक सेवा की मान्यता में, दीनशरण देवी दासी को एतद्द्वारा जीबीसी एमेरिटस का दर्जा प्रदान किया जाता है।

804.01: संन्यास नियुक्तियाँ: संन्यास प्रतीक्षा-सूची

[शीर्षक] — संन्यास प्रतीक्षा-सूची — 2025

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य-आदेश [पारित होने की तिथि] — 16 फ़रवरी, 2025

संकल्प किया जाता है कि:

संन्यास के लिए उम्मीदवार निम्नलिखित हैं:

वाल्मीकि दास (CCCD) इस वर्ष

विश्वावसु दास (NRS) (जर्मनी/बाल्टिक देश/रूस) इस वर्ष

आत्माराम दास (GGS) इस वर्ष

सव्यसाची दास (BCS) (स्वाज़ीलैंड) इस वर्ष

गोविंदनंदन दास (BCS) इस वर्ष

कमललोचन दास (GKG) (मुंबई) इस वर्ष

रुक्मिणी कृष्ण दास (GKG) उत्तर भारत संन्यास उम्मीदवार

नंद कुमार दास (BVG) रूस संन्यास उम्मीदवार

शांत नृसिंह दास (JPS) जयपुर संन्यास उम्मीदवार

मदनमोहन दास (MG) रूस संन्यास उम्मीदवार

चारु चंद्र दास (JPS) बांग्लादेश संन्यास उम्मीदवार

पद्मनयन दास (RGS) मायापुर संन्यास उम्मीदवार

805.01: मंत्रालय और स्थायी समिति नियुक्तियाँ: मंत्रालयों और स्थायी समितियों की पुनः पुष्टि

[शीर्षक] — मंत्रालयों और स्थायी समितियों की पुनः पुष्टि —2025

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य-आदेश [पारित होने की तिथि] — 23 फ़रवरी, 2025

संकल्प किया जाता है कि:

2025-26 के लिए मंत्रालय और स्थायी समितियाँ तथा उनकी सदस्यता-नियुक्तियाँ निम्नलिखित हैं:

सामुदायिक विकास मंत्रालय (कॉन्ग्रिगेशनल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री) मंत्री – जयपताका स्वामी

इस्कॉन विग्रह-आराधना मंत्रालय मंत्री – नृसिंह कवच दास (IDS) सदस्य: देवदेव दास (BCAIS), कार्यकारी निदेशक, मुरली मनोहर दास (SRS), मनोहर दास (SDG), राधा ठाकुरानी देवी दासी (BCAIS), नर-नारायण दास (KDS), श्यामप्रिया देवी दासी (SDA), योगेंद्र दास (BCAIS) इस्कॉन युवा मंत्रालय मंत्री – मनोरम दास (SNS) ग्रंथ-वितरण मंत्रालय मंत्री – वैशेषिक दास संचार मंत्रालय मंत्री – अनुत्तम दास

गो-संरक्षण एवं कृषि मंत्रालय मंत्री – कालकंठ दास (IS) IMCPA निदेशक मंडल (यूएसए): निरंजन स्वामी, शेष दास, वैकुंठ दास, कृष्ण किशोर दास, कालकंठ दास शिक्षा मंत्रालय मंत्री – तपन मिश्र दास (BVKS)

निधि-विकास मंत्रालय (फ़ंड डेवलपमेंट मिनिस्ट्री) मंत्री – देवकीनंदन दास (जुहू) सदस्य: गोविंद प्रेम दास (GKG), मुकुंद माधव दास (BSDS), मदन गोपाल दास (SDG), नील माधव दास (BCS), विजय गोपिकेश दास (JPS) न्याय मंत्रालय मंत्री – चंपकलता देवी दासी (IDS) ISKCONResolve सह-निदेशक: ब्रह्मतीर्थ दास, व्रज विहारी दास (BJD)

इस्कॉन विवाद-समाधान विभाग प्रह्लादानंद स्वामी (अध्यक्ष), चंपकलता दासी (उपाध्यक्ष) (IDS), देवकीनंदन दास (MVG), हंसरूप दास, नंद किशोर दास (GRS), व्रज विहारी दास (BJD), नवीन-श्याम दास (BCS), चंद्रशेखर स्वामी पदयात्रा मंत्रालय मंत्री – श्री कृष्ण चैतन्य स्वामी

संन्यास सेवा मंत्रालय मंत्री – प्रह्लादानंद स्वामी सदस्य: भक्ति गौरवाणी गोस्वामी, भक्तिवैभव स्वामी, भक्ति चैतन्य स्वामी, हृदय चैतन्य दास (SDG), देवकीनंदन दास (जुहू) वैष्णवी मंत्रालय सह-मंत्री – राधा दासी (MG), सती देवी दासी (BTS) इस्कॉन जनरल काउंसल देवकीनंदन दास (MVG)

जीबीसी नामांकन समिति सदस्य – राधा कृष्ण दास (BBGS) (अध्यक्ष), तपन मिश्र दास (BVKS), भक्ति चैतन्य स्वामी, प्रघोष दास (SDG), अनुत्तम दास, रेवती रमण दास (JPS), गौरांग दास (RNS), अनिरुद्ध दास (BJD), देवकीनंदन दास (MVG) जीबीसी संगठनात्मक विकास समिति अनिरुद्ध दास (BJD), (अध्यक्ष), गौरांग दास (RNS), गोवर्धन दास (BCAIS), अनुत्तम दास, भक्ति चैतन्य स्वामी, भक्तिवैभव स्वामी, बद्रीनारायण स्वामी, जयपताका स्वामी, प्रघोष दास (SDG), रेवती रमण दास (JPS), चैतन्य अवतारी दास (JPS), देवकीनंदन दास (जुहू), देवकीनंदन दास (MVG), गौर कृष्ण दास (HDG), प्रहरणा दासी, तपन मिश्र दास (BVKS), तीर्थराज दास (TKG), व्रज विहारी दास (BJD)

जीबीसी रणनीतिक योजना दल पंचरत्न दास (अध्यक्ष), अनंत शेष दास (IDS), गोविंद प्रिया देवी दासी (RNS), पारिजात दासी (RNS), आराध्य भगवान दास (BCS), तोषण निमाई दास (RNS)

बीबीटी-जीबीसी संबंध समिति सदस्य – प्रघोष दास (SDG) (समन्वयक), बद्रीनारायण स्वामी, मधु सेवित दास, देवामृत स्वामी, भक्तिवैभव स्वामी, देवकीनंदन दास (MVG), तपन मिश्र दास (BVKS), गोवर्धन दास (BCAIS) मथुरा मनोहर दास, बीबीटी ट्रस्टी और BBTI निदेशक जीबीसी वैष्णव कैलेंडर समिति सदस्य – भक्तरूप दास (संयोजक), भानु स्वामी, गोपालप्रिय दास (BVS), सदाशिवानंद दास (JPD),

गुरु सर्विसेज़ कमेटी सदस्य – अनुत्तम दास, प्रह्लादानंद स्वामी (अध्यक्ष), भक्ति चैतन्य स्वामी, रमाई स्वामी, भक्ति विज्ञान गोस्वामी, महात्मा दास, गोपिका राधिका देवी दासी (JPS), आनंद तीर्थ दास (PVS) CPOC (बाल संरक्षण निरीक्षण समिति) गोविंद लीलामृत देवी दासी (BHVS), आत्माराम दास (BTS), रासेश्वरी राधिका देवी दासी (LOK) ICPO अंतरिम निदेशक: चंपकलता देवी दासी (IDS)

इस्कॉन कीर्तन मंत्रालय मंत्री: श्री कृष्ण चैतन्य स्वामी सदस्य: जगन्नाथ कीर्तनानंद दास (JPS), दीनानुकंपा देवी दासी LOK

जीबीसी एग्ज़िक्यूटर्स प्रॉपर्टी ओवरसाइट कमेटी (GEPOC) जयपताका स्वामी, नृसिंहानंद दास, रामेश्वर दास, लोका देवी दासी (BTS), अक्षय रामचंद्र दास (JPS), सत्यमेध गौरांग दास

(JPS)

शास्त्रीय सलाहकार परिषद सदस्य: ऊर्मिला दासी (अध्यक्ष), भक्ति प्रभव स्वामी, हरि पार्षद दास (RGS), नारायणी दासी, आदि-पुरुष दास (GKG), सर्वज्ञ दास (NRS), कार्तिक चंद्र दास (RNS), महेंद्र दास (SS) सहयोगी सदस्य: कृष्ण क्षेत्र स्वामी, द्रुतकर्म दास, राधिका रमण दास (HPS), चैतन्य चरण दास (RNS), गोपीनाथ-आचार्य दास (KKS), भक्ति-विज्ञान गोस्वामी, गोपाल हरि दास (GKG), कन्हाई कृष्ण दास (RNS) नेतृत्व आचरण कार्यालय (लीडरशिप कंडक्ट ऑफ़िस) महाविष्णुप्रिया देवी दासी

उत्तराधिकार समिति चैतन्य अवतारी दास (JPS) गौरांग दास (RNS), भक्तिवैभव स्वामी, रासक्रीड़ा परायण दास (JPS), दीनशरण देवी दासी, देवकीनंदन दास (जुहू), अनिरुद्ध दास (BJD) वैष्णव स्मारक स्थायी समिति हृदय चैतन्य दास (संयोजक), भानु स्वामी, मालती देवी दासी, (SDG), गौरांग दास (RNS), नृसिंह कवच दास (IDS)

जीबीसी कार्यकारी सहायता कार्यालय कार्यकारी निदेशक: नंद किशोर दास (GRS) कॉर्पोरेट सेवाएँ: कृष्णनाम दास (RNS) जीबीसी संचार: पारिजात देवी दासी (RNS) मंत्रालय और समिति सहायता: जयललिता देवी दासी (KKS) जीबीसी पार्लियामेंटेरियन नृसिंह कवच दास (IDS)

जीबीसी सचिवालय कर्मचारी आनंद तीर्थ दास (PVS), पत्राचार सचिव राधा सुंदरी देवी दासी (RNS), ईसी सचिव महामणि गोविंद दास (JPS), कोषाध्यक्ष शुभ कृष्ण दास (RNS), जीबीसी कार्यालय प्रबंधक

807.01: लेखा-परीक्षक की नियुक्ति

[शीर्षक] — लेखा-परीक्षक की नियुक्ति — 2025

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य-आदेश [पारित होने की तिथि] — 22 फ़रवरी, 2025

संकल्प किया जाता है कि:

श्री रत्नेश सिंह चंदेल उर्फ़ रस परायण दास (GKG), पार्टनर, कोठारी चंदेल & को. चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, 219/220 कार्यालय सं. 2, मुरलीधर अपार्टमेंट, केलकर रोड, नारायण पेठ, पुणे 411030, को वर्ष 2025-26 के लिए वैधानिक लेखा-परीक्षक (स्टैच्यूटरी ऑडिटर) के रूप में नियुक्त किया जाता है।

810.02: ग्लोबल ड्यूटी ऑफ़िसर नियुक्तियाँ: पुनर्नियुक्तियाँ

[शीर्षक] — ग्लोबल ड्यूटी ऑफ़िसरों की पुनर्नियुक्ति — 2025

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य-आदेश [पारित होने की तिथि] — 15 फ़रवरी, 2025

संकल्प किया जाता है कि:

निम्नलिखित ग्लोबल ड्यूटी ऑफ़िसरों को एक वर्ष के और कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त किया जाता है:

अच्युत प्रिय दास (RNS) यूक्रेन भक्त-देखभाल असिताराध्य दास (VVPS) भारत ग्लोबल ड्यूटीज़ ऑफ़िस

गौरांग दास (RNS) भारत भक्त-देखभाल, भक्तिवेदान्त रिसर्च सेंटर, GEV 2.0 इन्द्रेश गौर दास (BBGS) कनाडा गोविंदाज़ मॉडल मुकुंद माधव दास (BSDS) भारत जीबीसी वित्त राधेश्याम दास (RNS) भारत पूर्णकालिक युवा भक्तों की भर्ती श्यामानंद कृष्ण दास (GKG) ऑस्ट्रेलिया पर्यावरण—ग्रीन टेम्पल इनिशिएटिव त्रिलोकात्मा दास (BVS) चेकिया कर्म फ़्री क्लब वैशेषिक दास यूएसए वन वर्ल्ड बुक डिस्ट्रीब्यूशन टीम

खंड 900: वित्तीय और कानूनी

901: जीबीसी वार्षिक बजट

[शीर्षक] – जीबीसी वार्षिक बजट — 2025

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – कार्य-आदेश [पारित होने की तिथि] – 21 फ़रवरी, 2025

संकल्प किया जाता है कि: 2025-26 के लिए जीबीसी बजट (INR में) इस प्रकार है:

बाल संरक्षण निरीक्षण समिति (CPOC) 38,28,000

दंडवत्स 609,000

डिप्टी — सहायक के लिए यात्रा 87,000

आपातकालीन निधि 435,000 कार्यकारी समिति यात्रा 348,000 वित्त एवं बैंक शुल्क 52,200 जीबीसी वार्षिक आम बैठक 582,900 जीबीसी पत्राचार सचिव 574,200 जीबीसी ईसी सचिव 574,200 जीबीसी रणनीतिक योजना दल 200,100 इस्कॉन सामुदायिक विकास मंत्रालय 522,000 इस्कॉन कनेक्शन 165,300 इस्कॉन विग्रह-आराधना मंत्रालय 891,750 इस्कॉन ग्लोबल प्रॉपर्टी ऑफ़िस 522,000 इस्कॉन कीर्तन मंत्रालय 174,000

इस्कॉन विधि विभाग 870,000

इस्कॉन न्यूज़ 435,000

ISKCONResolve 696,000

इस्कॉन युवा मंत्रालय 174,000

नेतृत्व आचरण कार्यालय 435,000

मायापुर जीबीसी कार्यालय एवं लेखा 522,000

गो-संरक्षण एवं कृषि मंत्रालय 652,500

शिक्षा मंत्रालय 696,000

न्याय मंत्रालय 435,000 पदयात्रा मंत्रालय 174,000 संन्यास सेवा मंत्रालय 261,000

सभा (SABHA) 261,000 श्रील प्रभुपाद व्यास-पूजा ग्रंथ 217,500 वैष्णवी मंत्रालय 174,000

कुल 1,55,68,650