जीबीसी प्रस्ताव 2026 (हिन्दी)

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इस्कॉन गवर्निंग बॉडी कमीशन सोसाइटी पंजीकरण संख्या S/74662, पश्चिम बंगाल सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1961 के अंतर्गत पो. श्री मायापुर धाम, जिला नदिया, पश्चिम बंगाल 741313 https://gbc.iskcon.org

वार्षिक आम बैठक 2026 के प्रस्ताव

2026 के क्षेत्रीय कार्यभार (ज़ोनल असाइनमेंट) देखें

खंड 100: श्रील प्रभुपाद

100.05: श्रील प्रभुपाद: तीर्थस्थल एवं स्मारक [शीर्षक] — भक्तिवेदान्त मैनर को तीर्थस्थल एवं स्मारक के रूप में मान्यता — 2025

[बैठक] — पत्राचार मतदान [श्रेणी] — वक्तव्य [पारित तिथि] — 29 मई, 2025

जबकि इस्कॉन विधि पुस्तक (लॉ बुक) में वर्तमान में कहा गया है:

100.2 तीर्थस्थल एवं स्मारक

1. श्रील प्रभुपाद की लीलाओं के स्थानों को स्थायी तीर्थस्थलों के रूप में बनाए रखा जाएगा, और उनकी सामग्री (उपयोग की वस्तुएँ) एकत्र करके उनके स्मारकों में संरक्षित की जाएँगी।

2. श्रील प्रभुपाद की पूजा बनाए रखने का उत्तरदायित्व समग्र रूप से इस्कॉन वहन करेगा और यह सोसाइटी के मंदिरों तथा दीक्षित भक्तों के बीच वितरित होगा।

3. भक्तिवेदान्त स्वामी स्मारक समिति नामक एक समिति होगी, जिसके सदस्य जीबीसी द्वारा नियुक्त किए जाएँगे। यह समिति निर्धारित करेगी कि श्रील प्रभुपाद के कक्षों और सामग्री को कहाँ और कैसे संरक्षित किया जाए। निम्नलिखित स्थानों पर श्रील प्रभुपाद के कक्षों को उनकी लीलाओं की स्मृति में स्थायी तीर्थस्थलों के रूप में बनाए रखा जाएगा:

• वृन्दावन-धाम

• मायापुर-धाम

• बम्बई

• लॉस एंजिल्स

• होनोलूलू

• अटलांटा

• डेट्रॉइट

• न्यू वृन्दावन

4. श्री मायापुर में श्रील प्रभुपाद की मूल घास की कुटिया (भजन कुटीर) भक्तिवेदान्त स्वामी स्मारक तीर्थस्थल होगी। (1981) इत्यादि।

जबकि श्रील प्रभुपाद जॉर्ज हैरिसन द्वारा भक्तिवेदान्त मैनर की खरीद में व्यक्तिगत रूप से सम्मिलित थे, उन्होंने 1973 से 1977 तक वहाँ महत्त्वपूर्ण समय बिताया, वहाँ अपने कक्षों में अनेक भक्तों और प्रमुख व्यक्तियों से भेंट और वार्तालाप किया (ये वार्तालाप बाद में बीबीटी द्वारा “आत्म-साक्षात्कार की यात्रा” जैसी छोटी पुस्तकों में प्रकाशित हुए), और वास्तव में मैनर को भारत के बाहर अपना अंतिम गंतव्य बनाया।

जबकि श्रील प्रभुपाद ने अनेक पत्रों और वार्तालापों में भक्तिवेदान्त मैनर का उल्लेख किया है, और इस प्रकार इस परियोजना पर बल दिया है।

जबकि श्रील प्रभुपाद भक्तिवेदान्त मैनर से अत्यंत प्रसन्न थे और उन्होंने इसे इस्कॉन का यूरोपीय मुख्यालय बनाया।

जबकि भक्तिवेदान्त मैनर में श्रील प्रभुपाद के कक्ष उन गिने-चुने शेष स्थानों में से एक हैं जहाँ श्रील प्रभुपाद काफ़ी लंबे समय तक व्यक्तिगत रूप से निवास करते थे।

अतः यह प्रस्तावित किया जाता है कि:

श्रील प्रभुपाद के भक्तिवेदान्त मैनर, वॉटफ़र्ड, यूके को तीर्थस्थल एवं स्मारक के रूप में आधिकारिक मान्यता दी जाए और इसे इस्कॉन विधि पुस्तक 100.2 तीर्थस्थल एवं स्मारक में सम्मिलित किया जाए।

खंड 200: गवर्निंग बॉडी कमीशन

201.03: गवर्निंग बॉडी कमीशन: निर्णय [शीर्षक]: जीबीसी के भीतर गोपनीयता और शासन-व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण — 2025

[बैठक]: मध्यावधि आम बैठक [श्रेणी]: वक्तव्य [पारित तिथि]: 2 अक्टूबर, 2025

जबकि जीबीसी इस्कॉन की अखंडता और भविष्य के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण संवेदनशील आध्यात्मिक एवं शासन-संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श करती है।

जबकि गोपनीयता का उल्लंघन आंदोलन के भीतर विश्वास, विश्वसनीयता और एकता को क्षीण कर सकता है।

जबकि आधुनिक शासन-व्यवस्था की सर्वोत्तम प्रथाओं के लिए सुरक्षित संचार, दस्तावेज़ प्रबंधन और जवाबदेही प्रणालियों की आवश्यकता होती है।

अतः यह प्रस्तावित किया जाता है कि:

1. Google Workspace को अपनाना: ईएसओ 2026 की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) तक जीबीसी के लिए एक समर्पित Google Workspace परिवेश लागू करेगा, जिसमें सुरक्षित ईमेल, दस्तावेज़ ड्राइव और सहयोग उपकरण सम्मिलित होंगे।

2. बोर्ड प्रबंधन सॉफ़्टवेयर: ईएसओ 2026 की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) तक जीबीसी के अनन्य उपयोग हेतु बोर्ड प्रबंधन सॉफ़्टवेयर (जैसे Diligent, Convene, या समकक्ष गैर-लाभकारी समाधान) प्राप्त करके लागू करेगा।

3. ईएसओ निगरानी: ईएसओ गोपनीयता प्रोटोकॉल के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और निगरानी प्रदान करेगा।

4. वार्षिक समीक्षा: जीबीसी प्रतिवर्ष इन उपायों की प्रभावशीलता की समीक्षा करेगी, और आवश्यकतानुसार इन्हें और सुदृढ़ करने के लिए सिफ़ारिशें करेगी।

201.04: गवर्निंग बॉडी कमीशन: सामान्य [शीर्षक] — श्रील प्रभुपाद के आदेश का पालन — 2014

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — स्थिति-पत्र [पारित तिथि] — 20 फ़रवरी, 2014

[टिप्पणी: यह पत्र मूल रूप से 2014 में पारित किया गया था, किंतु कानूनी कारणों से अब तक सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया था]

प्रस्तावित किया जाता है कि:

“श्रील प्रभुपाद के आदेश का पालन: इस्कॉन के सर्वोच्च प्रबंधकीय प्राधिकरण के रूप में जीबीसी” नामक दस्तावेज़ जीबीसी का एक आधिकारिक पत्र है और एक महत्त्वपूर्ण प्रस्तुति है, जो इस्कॉन के सर्वोच्च प्रबंधकीय प्राधिकरण के रूप में गवर्निंग बॉडी कमीशन (जीबीसी) की स्थापना में श्रील प्रभुपाद की दृष्टि और निर्देशों का अनुरेखण करती है। प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं, पत्राचार और आधारभूत दस्तावेज़ों के आधार पर, यह दर्शाती है कि किस प्रकार जीबीसी श्रील प्रभुपाद की इच्छा के साधन के रूप में और उस सूत्र के रूप में कार्य करती है जो इस्कॉन को एक एकीकृत, आध्यात्मिक रूप से जीवंत वैश्विक समाज के रूप में एक साथ बाँधे रखता है।

हम इस्कॉन समुदाय को इस संसाधन को देखने और साझा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, क्योंकि यह श्रील प्रभुपाद की दृष्टि के विषय में हमारी सामूहिक समझ को गहरा करता है और उस उत्तरदायित्व को रेखांकित करता है जो विश्व के उत्थान के लिए उनके द्वारा निर्मित संस्था को संरक्षित और सुदृढ़ करने में हम सभी का साझा है।

204.04 जीबीसी बैठकें: वार्षिक आम बैठक [शीर्षक]: 2027 की जीबीसी वार्षिक आम बैठक की तिथियाँ — 2026

[बैठक]: वार्षिक आम बैठक [श्रेणी]: कार्य आदेश [पारित तिथि]: 4 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

इस्कॉन गवर्निंग बॉडी कमीशन सोसाइटी की वार्षिक आम बैठक 21 फ़रवरी से 3 मार्च, 2027 तक इस्कॉन मायापुर, पश्चिम बंगाल, भारत में आयोजित की जाएगी।

तिथियों की विस्तृत सूची नीचे दी गई है:

रविवार 21 फ़रवरी जीबीसी पूर्ण सत्र सोमवार 22 फ़रवरी जीबीसी पूर्ण सत्र मंगलवार 23 फ़रवरी जीबीसी पूर्ण सत्र बुधवार 24 फ़रवरी जीबीसी पूर्ण सत्र गुरुवार 25 फ़रवरी इस्कॉन लीडरशिप संग शुक्रवार 26 फ़रवरी इस्कॉन लीडरशिप संग शनिवार 27 फ़रवरी इस्कॉन लीडरशिप संग रविवार 28 फ़रवरी इस्कॉन लीडरशिप संग सोमवार 01 मार्च जीबीसी पूर्ण सत्र मंगलवार 02 मार्च जीबीसी पूर्ण सत्र बुधवार 03 मार्च आरक्षित दिवस

204.06 जीबीसी बैठकें: मध्यावधि आम बैठक [शीर्षक]: 2026 की जीबीसी मध्यावधि आम बैठक की तिथियाँ — 2026

[बैठक]: वार्षिक आम बैठक [श्रेणी]: कार्य आदेश [पारित तिथि]: 4 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

इस्कॉन गवर्निंग बॉडी कमीशन सोसाइटी की मध्यावधि आम बैठक 19-23 अक्टूबर को गोवर्धन इको-विलेज, भारत में आयोजित की जाएगी।

खंड 300: इस्कॉन

301.08: इस्कॉन सदस्य: प्रशंसा-पत्र एवं धन्यवाद-प्रस्ताव [शीर्षक] — इस्कॉन संविधान प्रारूप समिति का आभार — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — धन्यवाद-प्रस्ताव [पारित तिथि] — 7 फ़रवरी, 2026

जबकि जीबीसी उस दल का आधिकारिक रूप से आभार व्यक्त करना चाहती है जिसने इस्कॉन संविधान को पूर्ण करने के लिए परिश्रमपूर्वक कार्य किया

अतः यह प्रस्तावित किया जाता है कि:

जीबीसी इस्कॉन संविधान परियोजना दल—अनुत्तम दास (ACBSP), देवकीनन्दन दास (MVG), देवश्री राधिका देवी दासी (BCS), कौन्तेय दास (JPS), पंचरत्न दास (ACBSP), और वृन्दा देवी दासी (GKG)—के प्रति अपनी कृतज्ञता और प्रशंसा अर्पित करती है।

जीबीसी उन अन्य भक्तों के प्रति भी अपनी कृतज्ञता और प्रशंसा व्यक्त करना चाहती है जिन्होंने विभिन्न चरणों में और विभिन्न मात्राओं में इस्कॉन संविधान परियोजना में भाग लिया है—अक्रूरनाथ दास (ACBSP), भक्तरूप दास (ACBSP), भक्ति गौरवाणी गोस्वामी (ACBSP), भक्तिमार्ग स्वामी (ACBSP), द्वारकाधीश दास, गोपिका राधिका देवी दासी (JPS), हृदय चैतन्य दास (SDG), कैशोरी देवी दासी (SDG), नृसिंह कवच दास (IDS), प्रघोष दास (SDG), परिवादी दास, प्रहरणा देवी दासी (ACBSP), प्रेम भक्ति दास (TKG), शालग्राम दास (TKG), और शेष दास (ACBSP)।

जीबीसी उन अनेक अन्य भक्तों का भी धन्यवाद करती है जिन्होंने वर्षों के दौरान प्रतिक्रिया और सुझाव दिए।

301.09: इस्कॉन सदस्य: निंदा-पत्र [शीर्षक] — कमलेश कृष्ण दास, लीलाशुका देवी दासी और दक्षिणा देवी दासी की निंदा की सूचना — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — वक्तव्य [पारित तिथि] — 9 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

जीबीसी निम्नलिखित निंदा-पत्र जारी करती है:

प्रिय कमलेश कृष्ण प्रभु,

कृपया हमारा विनम्र प्रणाम स्वीकार करें। श्रील प्रभुपाद की जय हो।

यह पत्र 21 फ़रवरी 2025 को पारित जीबीसी प्रस्ताव 450.03 का अनुपालन न करने के लिए आपके संबंध में गवर्निंग बॉडी कमीशन (जीबीसी) द्वारा अपनाई गई औपचारिक निंदा को अभिलिखित करता है।

जैसा कि आप जानते हैं, जीबीसी ने 3 जनवरी 2025 को एक संवर्धित बाल संरक्षण मॉडल को स्वीकृति दी थी। इसके शीघ्र बाद, नवगठित जीबीसी स्थायी समिति — बाल संरक्षण निरीक्षण समिति (CPOC)—ने 11 जनवरी 2025 को ही वेबसाइट और ईमेल क्रेडेंशियल्स सौंपने का औपचारिक अनुरोध किया, जिसके बाद प्रमुख दस्तावेज़ों के लिए अतिरिक्त अनुरोध किए गए। एक व्यवस्थित हस्तांतरण को सुगम बनाने हेतु एक बैठक में भाग लेने के लिए आपको आमंत्रित करते हुए अनेक ईमेल भेजे गए, किंतु कोई सहमति प्राप्त नहीं हुई, और वह बैठक कभी नहीं हुई। तत्पश्चात्, 21 फ़रवरी 2025 को जारी प्रस्ताव 450.03 ने यह अपेक्षा की कि न्याय मंत्री अंतरिम ICPO निदेशक के रूप में कार्य करें, और विशेष रूप से यह माँग की कि निवर्तमान ICPO निदेशक के रूप में आप, कमलेश कृष्ण दास, 1 मार्च 2025 तक एक व्यापक हस्तांतरण संपन्न करें।

प्रस्ताव में हस्तांतरण के अंतर्गत, अन्य बातों के साथ-साथ, मामलों की फ़ाइल टिप्पणियों, स्थिति-रिपोर्टों, अपूर्ण मामलों की सामग्री, जाँचकर्ताओं और पैनल सदस्यों की संपर्क जानकारी, तथा सुरक्षा-निरीक्षण की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सभी संबंधित डेटाबेस और अभिलेखों के हस्तांतरण का उल्लेख किया गया था। यह प्रस्ताव स्पष्ट और बाध्यकारी है।

इस निंदा के जारी होने की तिथि, 9 फ़रवरी 2026 तक, अपेक्षित व्यापक हस्तांतरण नहीं हुआ है।

पिछले एक वर्ष में, CPOC, इस्कॉन के महाधिवक्ता (जनरल काउंसल) और जीबीसी कार्यकारी समिति के माध्यम से आपके साथ इस विषय को उठाया गया। इसके अतिरिक्त, जून 2025 में एक जीबीसी ईसी फ़ाइल नोट जारी किया गया। जब फिर भी अनुपालन नहीं हुआ, तो जीबीसी ईसी ने आपको और लीलाशुका देवी दासी को 24 नवंबर 2025 दिनांकित एक अंतिम माँग-पत्र जारी किया। आपने समय-सीमा के अंतिम दिन, 15 दिसंबर 2025 को, एक उत्तर प्रस्तुत किया, जिसमें आपने अपना रुख फ़ाइलें/फ़ाइलों तक पहुँच न होने से बदलकर यह दावा किया कि कानूनी प्रतिबंध हस्तांतरण को रोकते हैं—एक ऐसी चिंता जो पहले कभी नहीं उठाई गई थी और जिसका, यदि वह वैध होती, तो हस्तांतरण अपेक्षित होने के समय ही समाधान किया जा सकता था।

परिणामस्वरूप, जीबीसी के महाधिवक्ता द्वारा एक बाहरी कानूनी राय ली गई, जिसमें यह निर्धारित किया गया कि आपने, पूर्व ICPO निदेशक के रूप में, जीबीसी के अधिकार के अंतर्गत इस्कॉन के एजेंट के रूप में कार्य किया, कि ये अभिलेख इस्कॉन की स्वामित्व वाली जानकारी हैं, और कि उन्हें जीबीसी के अधिकृत प्रतिनिधि को हस्तांतरित करने से इनकार करना कानूनी रूप से उचित नहीं है।

यह निष्कर्ष न केवल कानूनी स्थिति को, बल्कि संस्थागत सामान्य बुद्धि और नेतृत्व की जवाबदेही के सबसे मूलभूत मानकों को भी प्रतिबिंबित करता है। लगभग एक वर्ष तक इन अभिलेखों को आपके द्वारा लगातार रोके रखने से जीबीसी-स्वीकृत बाल संरक्षण ढाँचे के कार्यान्वयन में बाधा आई है और सुरक्षा के संदर्भ में निरीक्षण की निरंतरता बाधित हुई है।

दक्षिणा देवी दासी, जिन्होंने यूके CPO निदेशक के पद से त्यागपत्र दे दिया था, आपके निष्क्रिय कार्यालय की ओर से मामलों की फ़ाइलें अपलोड करती रहीं और लीलाशुका देवी दासी के चिकित्सा अवकाश की अवधि में उत्तरी अमेरिकी CPO में सेवा करती रहीं, और उन्हें सभी फ़ाइल डेटा तक पूर्ण पहुँच प्राप्त थी। उल्लेखनीय है कि लीलाशुका देवी दासी और दक्षिणा देवी दासी, जो हस्तांतरण के निर्देश से पूर्णतः अवगत थीं और जिनके पास उसे सुगम बनाने के साधन थे, वे भी कार्य करने में विफल रहीं और/या उन्होंने कार्य करने से इनकार किया।

ये विफलताएँ अलग-थलग भूलें नहीं, बल्कि प्रबंधन-दायित्व, पर्यवेक्षण और संस्थागत निरंतरता के प्रति प्रतिबद्धता की एक व्यवस्थागत कमी को प्रकट करती हैं। यह सर्वोच्च स्तर पर अवज्ञा और जवाबदेही की चूकों की एक श्रृंखला को दर्शाता है, क्योंकि विधिवत् अपनाए गए जीबीसी प्रस्तावों का अनुपालन इस्कॉन के भीतर सेवा का एक अनिवार्य दायित्व है, जबकि अधिकृत हस्तांतरणों के दौरान संस्थागत अभिलेखों का हस्तांतरण निरंतरता, जवाबदेही और जिनकी सेवा की जाती है उनकी सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

तदनुसार, जीबीसी औपचारिक रूप से निंदा करती है:

आपकी, कमलेश कृष्ण दास, प्रस्ताव 450.03 द्वारा अनिवार्य व्यापक हस्तांतरण को निष्पादित करने में विफलता और मूलभूत दूरदर्शिता एवं नेतृत्व का परिचय देने में विफलता के लिए।

लीलाशुका देवी दासी और दक्षिणा देवी दासी की, CPO फ़ाइलों और डेटाबेस को लगातार रोके रखने को सुगम बनाने या उसका समर्थन करने के लिए, ऐसी परिस्थितियों में जहाँ वे हस्तांतरण को सुगम बना सकती थीं। यह ध्यान देने योग्य है कि नवंबर 2025 की माँग के बाद, लीलाशुका देवी दासी ने इस्कॉन के महाधिवक्ता को केवल सात मामलों की फ़ाइलें हस्तांतरित कीं। ये सात फ़ाइलें केवल उत्तरी अमेरिका के खुले मामलों से संबंधित हैं। वे शेष सभी इस्कॉन बाल संरक्षण फ़ाइलें, हार्ड और सॉफ़्ट दोनों प्रतियाँ, अभी भी अपने पास रखे हुए हैं।

जीबीसी इस अननुपालन को संस्थागत उत्तरदायित्व के निर्वहन में एक गंभीर विफलता मानती है और इसे अक्षमता एवं लापरवाही का एक गंभीर मामला मानती है। ऐसा आचरण उन लोगों से अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं है जिन्हें शासन और सुरक्षा के उत्तरदायित्व सौंपे गए हैं, और यह ऐसी किसी भी भूमिका के साथ असंगत है जिसमें विश्वास, जवाबदेही और विवेकपूर्ण निर्णय की आवश्यकता होती है। इस तथ्य को देखते हुए कि आपका एक न्यासीय उत्तरदायित्व था—समय, प्रत्यायोजन और विरासत में मिली व्यवस्थाएँ किसी महत्त्वपूर्ण संक्रमण-बिंदु पर निर्णायक नेतृत्व के अभाव को क्षम्य नहीं बनातीं, क्योंकि कार्यों का प्रत्यायोजन उत्तरदायित्व का प्रत्यायोजन नहीं होता। सुरक्षा-संबंधी दस्तावेज़ इस कार्यालय के मूल परिचालन उत्तरदायित्व का प्रतिनिधित्व करते हैं, और उनके व्यवस्थित हस्तांतरण को सुनिश्चित करना प्रबंधन-दायित्व का एक सोचा-समझा, सक्रिय कार्य होना चाहिए था। यह स्थिति केवल एक प्रशासनिक चूक को नहीं, बल्कि आपके कार्यकाल की समाप्ति पर दूरदर्शिता, स्वामित्व-भाव और नेतृत्व-विवेक की एक चिंताजनक कमी को दर्शाती है।

तदनुसार, आपका आचरण, विशेष रूप से विधिवत् अपनाए गए जीबीसी प्रस्ताव का आपके द्वारा अननुपालन, सहयोग और जवाबदेही के उन मानकों से एक गंभीर विचलन को दर्शाता है जो बच्चों की सुरक्षा का दायित्व सौंपे गए और इस्कॉन में पद धारण करने वाले व्यक्तियों से अपेक्षित हैं। इसके परिणामस्वरूप संस्थागत विश्वास की हानि हुई है और इस्कॉन के भीतर नेतृत्व, शासन-अधिकार, निरीक्षण कार्यों, संस्थागत अभिलेखों या बाल संरक्षण उत्तरदायित्वों से जुड़े किसी भी पद या स्थान पर भविष्य में नियुक्ति की उपयुक्तता के संबंध में गंभीर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।

जीबीसी निकाय की ओर से,

आपके सेवक,

गोवर्धन दास तपन मिश्र दास मधु सेवित दास, (जीबीसी कार्यकारी समिति)

303.04: इस्कॉन — केंद्र एवं संबद्ध संस्थाएँ: व्यक्तिगत केंद्र [शीर्षक] — इस्कॉन वेलिंगटन संपत्ति की बिक्री — 2025

[बैठक] — ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] — कार्य आदेश [पारित तिथि] — 2 जून, 2025

जबकि जीबीसी एग्ज़ीक्यूटर्स प्रॉपर्टी ओवरसाइट कमेटी (GEPOC) वेलिंगटन, न्यूज़ीलैंड के मंदिर की बिक्री को इस आधार पर स्वीकृत करने की सिफ़ारिश करती है कि बिक्री की संपूर्ण शुद्ध आय का उपयोग एक नए, बड़े, भवन-संहिता के अनुरूप मंदिर भवन की खरीद के लिए किया जाएगा, जिसके कारण निम्नलिखित हैं:

1. वर्तमान वेलिंगटन, न्यूज़ीलैंड मंदिर को सार्वजनिक सभा के लिए बंद करने का आदेश दिया गया था, जब तक कि इसका भवन-संहिताओं और विशेष रूप से दिव्यांग-सुलभता के अनुरूप नवीनीकरण न किया जाए। इसके लिए दिव्यांग-सुलभ शौचालयों का पुनर्निर्माण या निर्माण करना होगा। वर्तमान में मंदिर का उपयोग सार्वजनिक पूजा, कीर्तन, कक्षाओं या भक्तों और अतिथियों को प्रसाद परोसने के लिए नहीं किया जा सकता।

2. यदि ऐसे नवीनीकरण किए जाते, तो स्थानीय अधिकारी सार्वजनिक सभा आदि के लिए ज़ोनिंग हेतु आवेदन कर सकते थे।

3. यदि ऐसे नवीनीकरण की योजना बनाई जाती, तो स्थानीय जीबीसी और मंदिर अध्यक्ष का मत था कि भारी वर्षा के दौरान नियमित रूप से आने वाली बाढ़ से बचने के लिए पूरे भवन को ऊँचा उठाया जाना चाहिए।

4. स्थानीय जीबीसी और मंदिर अध्यक्ष का मानना है कि ऐसा महँगा नवीनीकरण कार्य किए जाने पर भी, मंदिर में विकास की, या सुरक्षित पार्किंग तक की, गुंजाइश नहीं है।

5. स्थानीय जीबीसी और मंदिर अध्यक्ष ने पेटोन (20 मील दूर) में एक वैकल्पिक भवन की पहचान की है जो बिक्री के लिए उपलब्ध है, भवन-संहिता के अनुरूप है और जिसमें पर्याप्त पार्किंग है, तथा वर्तमान में वाणिज्यिक कार्यालयों के रूप में उपयोग हो रहा है। यदि इसे खरीदा जाता है, तो विग्रहों के लिए उपयुक्त और बढ़ते भक्त एवं आजीवन सदस्य समुदाय को समायोजित करने योग्य एक बड़ा मंदिर-कक्ष बनाने हेतु नवीनीकरण किया जा सकता है।

6. मंदिर अध्यक्ष ने खरीद के लिए लगभग $700,000 NZD एकत्र करके एक इस्कॉन खाते में जमा किए हैं। वर्तमान वेलिंगटन स्थल की बिक्री से प्राप्त आय खरीद पूर्ण करने के लिए पर्याप्त अतिरिक्त धनराशि प्रदान करेगी, यद्यपि वेलिंगटन मंदिर संपत्ति पर वर्तमान में विद्यमान बंधक (मॉर्गेज) की तुलना में बड़े बंधक के साथ।

7. वर्तमान विग्रह अपेक्षाकृत छोटे गौर-निताई विग्रह हैं, जिन्हें सुरक्षित रूप से स्थानांतरित किया जा सकता है। इस्कॉन विग्रह पूजा मंत्रालय ने हट सिटी काउंसिल से मंदिर/सार्वजनिक सभा हेतु ज़ोनिंग प्राप्त होने के आधार पर स्थानांतरण पर कोई आपत्ति नहीं जताई है।

जबकि उपर्युक्त कारणों के आधार पर, GEPOC को बताए गए उद्देश्य के लिए प्रस्तावित बिक्री पर कोई आपत्ति नहीं है

अतः यह प्रस्तावित किया जाता है कि:

जीबीसी एतद्द्वारा प्रस्तुत किए गए अनुसार इस्कॉन वेलिंगटन संपत्ति की बिक्री को स्वीकृति देती है।

306.02: इस्कॉन अंतरराष्ट्रीय परियोजनाएँ: मायापुर [शीर्षक] — मायापुर समीक्षा — 2025

[बैठक] — ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] — कार्य आदेश [पारित तिथि] — 25 जून, 2025

प्रस्तावित किया जाता है कि:

जीबीसी, जीबीसी कार्यकारी समिति (ईसी) और महाधिवक्ता (जीसी) को श्रीधाम मायापुर के प्रबंधन की समीक्षा की देखरेख करने तथा समीक्षा पूर्ण होने तक प्रत्येक तिमाही में इसकी प्रगति की जानकारी देने के लिए अधिकृत करती है, जिसमें पहली जानकारी दिसंबर 2025 को या उससे पहले दी जाएगी

307.03: इस्कॉन — अन्य: इस्कॉन संविधान [शीर्षक] — इस्कॉन संविधान का अनुसमर्थन — 2025

[बैठक] — ऑनलाइन आम बैठक [श्रेणी] — कार्य आदेश [पारित तिथि] — 16 अप्रैल, 2025

जबकि अक्टूबर 2006 में जीबीसी ने प्रस्ताव पारित किया था कि इस्कॉन के भविष्य के स्वास्थ्य के लिए प्राथमिकताओं में से एक संविधान का होना है।

जबकि प्रारूप समिति के सदस्यों ने विभिन्न प्रारूपों के माध्यम से एक ऐसा संस्करण तैयार किया है जिसे जीबीसी ने स्वीकार और अनुसमर्थित किया।

अतः यह प्रस्तावित किया जाता है कि:

निम्नलिखित संलग्न (लिंक किए गए) दस्तावेज़ को एतद्द्वारा अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ के आधिकारिक संविधान के रूप में मान्यता दी जाती है।

खंड 400: इस्कॉन मंत्रालय, समितियाँ और कार्यालय

407.02: इस्कॉन विग्रह पूजा मंत्रालय: प्रतिष्ठाएँ [शीर्षक] — उत्तरी अटलांटा, यूएसए में लक्ष्मी-नृसिंह और प्रह्लाद महाराज की पूजा — 2025

[बैठक] – पत्राचार मतदान [श्रेणी] – वक्तव्य [पारित तिथि] — 29 मई, 2025

जबकि उत्तरी अटलांटा में रहने वाले इस्कॉन भक्तों के एक समूह ने एक मंदिर स्थापित किया है और अब वे चाहते हैं कि इसे

जीबीसी के अधिकार-क्षेत्र और मार्गदर्शन के अंतर्गत आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त और संबद्ध इस्कॉन मंदिर बनाया जाए।

जबकि उत्तरी अमेरिकी क्षेत्रीय शासी निकाय (NA RGB) एतद्द्वारा उत्तरी अटलांटा केंद्र को अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) में औपचारिक रूप से स्वीकार करने का प्रस्ताव करता है।

जबकि NA RGB ने निर्धारित किया है कि उत्तरी अटलांटा केंद्र को इस्कॉन मंदिर के रूप में औपचारिक मान्यता मिलने की एक पूर्व-शर्त के रूप में, उसके विग्रह पूजा के मानकों को पहले इस्कॉन विग्रह पूजा मंत्रालय (IDWM) से स्वीकृति प्राप्त होनी चाहिए।

जबकि NA RGB ने IDWM से औपचारिक रूप से अनुरोध किया है कि वह उत्तरी अटलांटा केंद्र में विग्रह पूजा की समीक्षा करे और अपने निष्कर्षों की एक रिपोर्ट NA RGB को प्रस्तुत करे।

जबकि उत्तरी अटलांटा केंद्र ने इन विग्रहों की पूजा के लिए औपचारिक आवेदन प्रस्तुत किया है: गौर-निताई (बड़े एवं छोटे), लक्ष्मी-नृसिंहदेव और प्रह्लाद महाराज (बड़े एवं छोटे), दो (2) शालग्राम-शिलाएँ, श्रील प्रभुपाद (बड़े एवं छोटे) तथा गुरु-परम्परा के छोटे विग्रह।

जबकि उत्तरी अटलांटा केंद्र ने 6 मई, 2023 को इन विग्रहों की स्थापना की थी और तब से निरंतर उनकी पूजा कर रहा है।

जबकि इस्कॉन विधि “प्रतिष्ठाओं का विनियमन — 2017” में कहा गया है:

श्रील प्रभुपाद द्वारा दिए गए विग्रहों, अर्थात् राधा-कृष्ण; जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा; गौर-निताई (या पंच-तत्त्व); और शालग्राम शिलाओं के अतिरिक्त किन्हीं भी विग्रहों के आवेदनों के लिए IDWM को कार्यकारी परामर्श की आवश्यकता होती है। अतः कृष्ण-बलराम या सीता राम लक्ष्मण हनुमान को सम्मिलित करने वाले किसी भी आवेदन के लिए, IDWM स्वीकृति हेतु जीबीसी कार्यकारी समिति से परामर्श करेगा। उपर्युक्त के अतिरिक्त किन्हीं भी विग्रहों को, IDWM द्वारा विग्रह प्रतिष्ठा हेतु तत्परता-प्रमाणपत्र जारी किए जाने से पहले, जीबीसी निकाय द्वारा स्वीकृत किया जाना आवश्यक है।

जबकि इस विधि का प्रस्ताव करते समय IDWM का आशय यह था कि उपर्युक्त इस्कॉन विनियम न केवल किसी इस्कॉन केंद्र में नए विग्रहों की पूजा आरंभ करने पर, बल्कि उन स्थितियों में भी लागू होगा जहाँ पहले से विग्रहों वाला कोई गैर-इस्कॉन केंद्र या मंदिर इस्कॉन केंद्र के रूप में संबद्ध होना चाहता है।

जबकि इस प्रस्ताव का उद्देश्य किसी केंद्र की विग्रहों की पूजा और देखभाल को उचित रूप से बनाए रखने की क्षमता का मूल्यांकन करना है, ताकि यह सुनिश्चित हो कि उनकी पूजा भविष्य में सोसाइटी पर अनुचित भार न बने।

जबकि उत्तरी अमेरिका के दक्षिण-पूर्व (ज़ोन 3) के क्षेत्रीय जीबीसी, बीर कृष्ण गोस्वामी ने उत्तरी अटलांटा केंद्र के आधिकारिक इस्कॉन केंद्र बनने और उपर्युक्त विग्रहों की पूजा जारी रहने के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।

जबकि IDWM के उत्तरी अमेरिकी प्रतिनिधियों ने योग्य ब्राह्मणों की उपलब्धता तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं और संसाधनों के लिए उत्तरी अटलांटा केंद्र का मूल्यांकन किया है।

जबकि उत्तरी अटलांटा केंद्र को व्यापक इस्कॉन समुदाय में एकीकृत करने के महत्त्व को पहचानते हुए, और क्षेत्रीय निदेशक बलभद्र भट्टाचार्य दास तथा उत्तरी अटलांटा केंद्र के मंदिर अध्यक्ष श्याम बिहारी दास से परामर्श के बाद—जिन्होंने स्थानीय समुदाय का निरंतर मार्गदर्शन और समर्थन करने के प्रति अपना समर्पण और प्रतिबद्धता, तथा इस्कॉन विग्रह पूजा मंत्रालय द्वारा जारी सभी सिफ़ारिशों को एक व्यवस्थित और समयबद्ध ढंग से पूर्णतः लागू करने की अपनी तत्परता व्यक्त की है—IDWM उत्तरी अटलांटा केंद्र में विग्रह पूजा को स्वीकृति देने के लिए तैयार है।

अतः यह प्रस्तावित किया जाता है कि:

इस्कॉन विग्रह पूजा मंत्रालय को एतद्द्वारा लक्ष्मी-नृसिंहदेव और प्रह्लाद महाराज (बड़े और छोटे दोनों) की पूजा के लिए उत्तरी अटलांटा केंद्र को तत्परता-प्रमाणपत्र जारी करने हेतु अधिकृत किया जाता है।

407.02: इस्कॉन विग्रह पूजा मंत्रालय: प्रतिष्ठाएँ [शीर्षक] — गुरुग्राम में ललिता-विशाखा विग्रहों की प्रतिष्ठा — 2025

[बैठक] — पत्राचार मतदान [श्रेणी] — कार्य आदेश [पारित तिथि] — 4 फ़रवरी, 2026

जबकि इस्कॉन गुरुग्राम सेक्टर 45 ने 5 नवंबर 2025 को राधा-कृष्ण के विग्रहों के साथ ललिता-विशाखा के 42-इंच संगमरमर के विग्रहों की प्रतिष्ठा की अनुमति का अनुरोध किया है।

जबकि इस्कॉन विग्रह पूजा मंत्रालय को ललिता-विशाखा विग्रहों की स्वीकृति देने के लिए जीबीसी की अनुमति आवश्यक है।

जबकि इस्कॉन विग्रह पूजा मंत्रालय के भारतीय प्रतिनिधियों ने आकलन किया है कि इस्कॉन गुरुग्राम सेक्टर 45 के पास राधा-कृष्ण ललिता-विशाखा के विग्रहों की देखभाल के लिए सभी आवश्यक ब्राह्मण और अन्य सुविधाएँ हैं।

अतः यह प्रस्तावित किया जाता है कि:

इस्कॉन विग्रह पूजा मंत्रालय को एतद्द्वारा ललिता-विशाखा के 42-इंच संगमरमर के विग्रहों के लिए इस्कॉन गुरुग्राम – सेक्टर 45 को तत्परता-प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति दी जाती है।

444.02 जीबीसी उत्तराधिकार समिति: निर्णय [शीर्षक]: जीबीसी उत्तराधिकार समिति सुविधा दल के सदस्य — 2025

[बैठक]: मध्यावधि आम बैठक [श्रेणी]: वक्तव्य [पारित तिथि]: 4 अक्टूबर, 2025

जबकि नेतृत्व के सभी स्तरों पर उत्तराधिकार इस्कॉन की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए एक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है।

जबकि जीबीसी निकाय पहले ही व्यवस्थित और निर्बाध संक्रमण स्थापित करने की तात्कालिकता को, विशेष रूप से जीबीसी स्तर पर, स्वीकार कर चुका है।

जबकि एक स्पष्ट, व्यवस्थित दृष्टिकोण के बिना, इस्कॉन के सामने नेतृत्व-शून्यता, भ्रम और संगठनात्मक शक्ति के क्षीण होने का जोखिम है।

जबकि 2025 की एजीएम में, जीबीसी ने एक कार्यान्वयन-योग्य ढाँचे का प्रारूप तैयार करने के लिए एक उत्तराधिकार समिति का गठन किया।

जबकि राष्ट्रीय परिषदों के साथ वैश्विक परामर्श के बाद, समिति ने एक जीबीसी उत्तराधिकार सुविधा समिति की स्थापना की, ताकि:

• जीबीसी, राष्ट्रीय परिषदों और ज़ोनों के बीच व्यवस्थित संचार का समन्वय किया जा सके

• योग्य उत्तराधिकार उम्मीदवारों की पहचान, आकलन और सिफ़ारिश की जा सके

• संक्रमण योजना में ज़ोनों की सहायता की जा सके

• जीबीसी निकाय को जवाबदेही और नियमित रिपोर्टिंग प्रदान की जा सके।

जबकि यह प्रस्ताव सुविधा दल (ज़ोन-वार) की सदस्यता को औपचारिक रूप देता है और सभी जीबीसी सदस्यों के इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए एक समय-सारणी स्थापित करता है। 31 जनवरी, 2026 तक, प्रत्येक जीबीसी सदस्य सुविधा दल के साथ उत्तराधिकार पर चर्चा आरंभ कर चुका होगा और सुविधा दल के साथ संभावित नामों पर विचार करना आरंभ करेगा। मायापुर में 2026 की एजीएम में एक व्यापक प्रगति-विवरण प्रस्तुत किया जाएगा।

जबकि यह कार्रवाई सुनिश्चित करती है कि इस्कॉन का वैश्विक शासन सशक्त, स्थिर और श्रील प्रभुपाद की दृष्टि के प्रति निष्ठावान बना रहे।

अतः यह प्रस्तावित किया जाता है कि:

जीबीसी निकाय निम्नलिखित भक्तों को उनके संबंधित ज़ोनों के लिए जीबीसी उत्तराधिकार सुविधा दल के सदस्यों के रूप में स्वीकृति देता है, जिनकी पुष्टि प्रतिवर्ष जीबीसी एजीएम में पुनः की जाएगी:

• अफ्रीका: उमापति दास (GKG) एवं हरिदेव दास (BCAIS)

• अरब लीग एवं इस्लामी देश: श्रीवल्लभ दास (JPS), अनिरुद्ध गोपाल दास (JPS), व्रजप्राण दास (JPS)

• लैटिन अमेरिका: परमात्मा दास (SDG), प्रेम रूप माधव दास (JPS) एवं देवकीनन्दन दास (ब्राज़ील) (HPS)

• यूरोप: कृष्ण प्रेमरूप दास (BSDS) पराभक्ति दास (RNS)

• रूस एवं मध्य एशिया: अप्रमेयात्मा दास (SRS), आदि गोपीनाथ दास (GKG)

• एशिया: दक्षिण-पूर्व एशिया – श्री नारायण दास (GKG), रघुनन्दन दास (MVG)

• ओशिनिया एवं इंडोनेशिया: अनिरुद्ध दास (BJD) एवं कृष्ण चन्द्र दास (BKG)

• उत्तरी अमेरिका: श्रुतिसागर दास (KKD) एवं गोविन्द प्रिया देवी दासी (RNS)

• भारतीय उपमहाद्वीप: o उत्तर – ऋषिकुमार दास (GKG) एवं सुन्दर गोपाल दास (GKG) o पश्चिम – मुकुन्द माधव दास (BSDS) o पूर्व – बी.वी. भागवत स्वामी (JPS) o दक्षिण – नारायण चैतन्य दास (JPS)

444.02 जीबीसी उत्तराधिकार समिति: निर्णय [शीर्षक]: जीबीसी सदस्यों द्वारा उत्तराधिकार समिति को उत्तराधिकारियों के नाम प्रस्तुत करना — 2025

[बैठक]: मध्यावधि आम बैठक [श्रेणी]: वक्तव्य [पारित तिथि]: 4 अक्टूबर, 2025

प्रस्तावित किया जाता है कि:

वे सभी जीबीसी सदस्य जिन्होंने अभी तक अपने उत्तराधिकारी के रूप में प्रस्तावित उम्मीदवारों की पहचान नहीं की है, अपने संबंधित ज़ोन के सुविधा दल के साथ कार्य करेंगे और जब भी संभव हो, संभावित नाम उत्तराधिकार समिति के सह-संयोजकों (गौरांग दास एवं चैतन्य अवतारी दास) को प्रस्तुत करेंगे।

संभावित जीबीसी नामांकितों के नामों और स्थिति के संदर्भ में उत्तराधिकार समिति के कार्य की प्रगति की समीक्षा प्रतिवर्ष एजीएम और एमजीएम में की जाएगी।

446.01: इस्कॉन संविधान की प्रारूप समिति: समिति [शीर्षक] — इस्कॉन संविधान की प्रारूप समिति की स्थापना — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — प्रशासनिक आदेश [पारित तिथि] — 7 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

इस्कॉन संविधान के पाठ का संकलन पूर्ण कर लेने के पश्चात्, इस्कॉन संविधान परियोजना दल को एतद्द्वारा औपचारिक रूप से “इस्कॉन संविधान की प्रारूप समिति” के रूप में स्वीकार किया जाता है।

प्रारूप समिति संविधान के शब्दों, भावना और अनुप्रयोग की व्याख्या से संबंधित प्रश्नों के लिए एक संदर्भ और संसाधन के रूप में जीबीसी और शेष इस्कॉन के लिए उपलब्ध रहेगी।

447.23: अन्य समितियाँ: 60-50 स्मरणोत्सव वैश्विक समिति [शीर्षक] — इस्कॉन की 60वीं वर्षगाँठ और श्रील प्रभुपाद के तिरोभाव की 50वीं वर्षगाँठ वैश्विक समिति — 2025

[बैठक] — मध्यावधि आम बैठक [श्रेणी] — प्रशासनिक आदेश [पारित तिथि] — 5 अक्टूबर, 2025

जबकि 2026 में इस्कॉन की 60वीं वर्षगाँठ और 2027 में श्रील प्रभुपाद के तिरोभाव की 50वीं वर्षगाँठ, दोनों का आयोजन इस्कॉन सदस्यों के हमारे संस्थापकाचार्य ए.सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद के साथ संबंध को गहरा करने और श्रील प्रभुपाद के इस्कॉन मिशन का विस्तार करने के उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है।

जबकि इन आयोजनों के लिए इस्कॉन के प्रयासों की सफलता को अधिकतम करने हेतु अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व, सहायता और समन्वय की आवश्यकता है।

जबकि इन आयोजनों का एक के बाद एक निकट आना एक संयुक्त दृष्टिकोण और एकीकृत प्रयास को आवश्यक बनाता है।

जबकि भक्तों, मंदिरों और ज़ोनों को इस वर्ष, 2025 में, इन आयोजनों की योजना और तैयारी के लिए प्रोत्साहित और समर्थित किया जाना चाहिए।

अतः यह प्रस्तावित किया जाता है कि:

60-50 स्मरणोत्सव वैश्विक समिति का गठन किया जाता है।

इसके प्रारंभिक सदस्यों में अनुत्तम दास (सह-अध्यक्ष, इस्कॉन संचार मंत्री), पंचरत्न दास (सह-अध्यक्ष, जीबीसी SPT), और पारिजात देवी दासी (जीबीसी कार्यकारी सहायता कार्यालय — ईएसओ, निदेशक – संचार) सम्मिलित होंगे। वे आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सदस्य जोड़ेंगे।

जीबीसी, क्षेत्रीय शासी निकायों, इस्कॉन मंत्रालयों, मंदिरों तथा अन्य इस्कॉन समुदायों और परियोजनाओं को अनेक कार्यक्रमों और आयोजनों की योजना बनाने और उन्हें संचालित करने के लिए राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय समितियाँ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। वैश्विक समिति उपयुक्त ग्राफ़िक्स, विषयवस्तु तथा आयोजन और कार्यक्रम के विचारों और दिशानिर्देशों सहित सहायता विकसित करेगी और प्रदान करेगी

450.03: इस्कॉन केंद्रीय बाल संरक्षण कार्यालय (CPO): बाल संरक्षण निरीक्षण समिति (CPOC) [शीर्षक] — विशेष अंतरिम समीक्षा पैनल — 2026

[बैठक] — पत्राचार मतदान [श्रेणी] — कार्य आदेश [पारित तिथि] — 24 मार्च, 2026

जबकि संवर्धित दृष्टिकोण बाल संरक्षण प्रणाली की ओर संक्रमण में, बाल संरक्षण के कुछ मामले अनसुलझे रह गए, और मामलों के विश्वसनीय अभिलेख कभी सौंपे नहीं गए या अपूर्ण हैं।

जबकि मामलों का समाधान न होने के साथ-साथ फ़ाइलें न सौंपे जाने से वह संक्रमणकालीन ढाँचा बाधित हुआ है जिसके अंतर्गत अंतरिम निदेशक से अपीलों सहित लंबित CPO मामलों को अंतिम रूप देने की अपेक्षा थी।

जबकि रोकी गई फ़ाइलें, अपूर्ण न्यायनिर्णयन और अनसुलझी अपीलें पीड़ितों, आरोपी भक्तों, परिवारों और समुदायों के लिए निरंतर कष्ट का कारण बनती हैं, जबकि बिना समापन के अनसुलझे प्रतिबंधों को जारी रखना इस्कॉन के देखभाल और करुणा के कर्तव्य के विपरीत है।

जबकि बच्चों की रक्षा करना भक्तिपूर्ण देखभाल का एक कार्य है, जिसके लिए समयबद्ध, निष्पक्ष और सुसंगत समाधान आवश्यक है।

जबकि कानूनी परामर्श यह पुष्टि करता है कि मुकदमों की स्थिति में, जब निष्पक्ष और पारदर्शी आंतरिक प्रक्रियाएँ विद्यमान होती हैं, तो दीवानी न्यायालय सामान्यतः किसी धार्मिक निकाय के सर्वोच्च प्राधिकरण के निर्णय को मान्यता देते हैं।

अतः यह प्रस्तावित किया जाता है कि:

जीबीसी एतद्द्वारा बाल संरक्षण निरीक्षण समिति (CPOC) के निरीक्षण में कार्यरत विशेष अंतरिम समीक्षा पैनलों (SIRPs) की स्थापना को अधिकृत करती है, ताकि अंतिम न्यायनिर्णयन और/या अपीलों के बिना लंबित बाल संरक्षण मामलों का निपटारा किया जा सके, जिसमें स्पष्ट रूप से वे सभी मामले बाहर रखे गए हैं जिनका पूर्ण न्यायनिर्णयन हो चुका है और जिनमें किसी विशेष मामले में CPO के निर्णय की तिथि से 60-दिन की समय-सीमा के भीतर अपील दायर नहीं की गई है।

CPOC और इस्कॉन का विधि विभाग विशेष अंतरिम समीक्षा पैनलों के लिए योग्य सदस्यों की पहचान और चयन हेतु मिलकर कार्य करेंगे।

विशेष अंतरिम समीक्षा पैनल CPO दिशानिर्देश 2023 में निर्धारित न्यायनिर्णयन और अपील प्रक्रियाओं का पालन करेंगे। यदि CPO दिशानिर्देश 2023 के दायरे से बाहर कोई अनिवार्य विषय उत्पन्न होते हैं, तो विशेष अंतरिम समीक्षा पैनल CPOC से मार्गदर्शन लेंगे, जो प्रक्रियात्मक अखंडता के उच्चतम स्तर को सुनिश्चित करने के लिए इस्कॉन विधि विभाग से परामर्श कर सकती है।

प्रक्रियात्मक समापन प्राप्त करने के लिए एक विशेष अंतरिम समीक्षा पैनल एक लिखित, तर्कसंगत और आंतरिक रूप से सुसंगत निर्धारण जारी करेगा।

अपीलें:

यदि लागू प्रक्रियाओं के अंतर्गत किसी अपील की अनुमति हो या वह आवश्यक हो, तो अपील की सुनवाई एक नवगठित विशेष अंतरिम समीक्षा पैनल द्वारा की जाएगी, जो ऐसे सदस्यों से बना होगा जिन्होंने मूल न्यायनिर्णयन में भाग नहीं लिया था।

यह अपीलीय विशेष अंतरिम समीक्षा पैनल CPO दिशानिर्देश 2023 के अनुसार मामले की समीक्षा करेगा और एक लिखित, तर्कसंगत और आंतरिक रूप से सुसंगत निर्धारण जारी करेगा, जो विशेष अंतरिम समीक्षा पैनल प्रक्रिया के भीतर अंतिम निर्णय होगा।

पूर्व अंतरराष्ट्रीय बाल संरक्षण कार्यालय से सभी मामलों की फ़ाइलों का पूर्ण हस्तांतरण हो जाने पर, विशेष अंतरिम समीक्षा पैनलों को कोई और मामले नहीं दिए जाएँगे और वे केवल उन्हीं मामलों को पूर्ण करेंगे जिन्हें वे पहले ही आरंभ कर चुके हैं।

450.03: इस्कॉन केंद्रीय बाल संरक्षण कार्यालय (CPO): बाल संरक्षण निरीक्षण समिति (CPOC) [शीर्षक] — ऐतिहासिक मामला-अभिलेखों का स्वामित्व और पुनर्प्राप्ति — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — वक्तव्य [पारित तिथि] — 9 फ़रवरी, 2026

जबकि जीबीसी ने बाल संरक्षण के संवर्धित दृष्टिकोण के अंतर्गत इस्कॉन के बाल संरक्षण शासन में सुधार और उसे सुदृढ़ करने के लिए बाल संरक्षण निरीक्षण समिति (CPOC) की स्थापना की।

जबकि जीबीसी ने एक निर्धारित संक्रमण-अवधि के लिए एक अंतरिम अंतरराष्ट्रीय बाल संरक्षण कार्यालय निदेशक नियुक्त किया, और स्पष्ट रूप से यह अपेक्षा की कि पिछले अंतरराष्ट्रीय बाल संरक्षण कार्यालय और उसके निदेशक से बाल संरक्षण के सभी मामलों की फ़ाइलें और अभिलेख पूर्ण रूप से सौंपे जाएँ।

जबकि स्पष्ट जीबीसी निर्देशों और कार्यकारी समिति के फ़ाइल नोटों के बावजूद, संस्थागत मामला-फ़ाइलों का पूर्ण हस्तांतरण नहीं हुआ है, और फ़ाइलों का एक बड़ा भाग एक पूर्व पदधारक के अधिकार में बना हुआ है, जो 21 फ़रवरी, 2025 के जीबीसी प्रस्ताव 450.03 का प्रत्यक्ष अननुपालन है:

“वर्तमान ICPO निदेशक द्वारा संक्रमणकालीन ICPO निदेशक को एक व्यापक हस्तांतरण प्रक्रिया संपन्न की जाएगी। इस प्रक्रिया में, अपूर्ण मामला-फ़ाइलों पर विशेष ध्यान देते हुए, सभी मामला-फ़ाइल टिप्पणियों, स्थिति-रिपोर्टों, तथा पैनल सदस्यों और जाँचकर्ताओं की संपर्क जानकारी का हस्तांतरण सम्मिलित होगा, किंतु यह इन्हीं तक सीमित नहीं है। इसके अतिरिक्त, निरंतरता और निरीक्षण सुनिश्चित करने के लिए, सभी संबंधित डेटाबेस—जिनमें शिकायतें, अपराधी, बाल संरक्षण दल (CPTs) और पैनल सदस्य सम्मिलित हैं—वर्तमान ICPO निदेशक द्वारा संक्रमणकालीन ICPO निदेशक को पूर्ण रूप से हस्तांतरित किए जाने चाहिए।”

जबकि कुछ क्षेत्रीय प्राधिकरणों ने अपनी अभिरक्षा से कुछ फ़ाइलें हस्तांतरित की हैं, जिससे पुष्टि होती है कि ऐसा हस्तांतरण संभव और उचित दोनों है।

जबकि अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा संस्थागत मामला-फ़ाइलों को लगातार अपने पास रखे रहने से अपीलों की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष बाधा आई है, उचित प्रक्रिया अवरुद्ध हुई है, और निरंतर नैतिक, पारमार्थिक-देखभाल संबंधी और परिचालन हानि हुई है।

जबकि बाल संरक्षण की सभी मामला-फ़ाइलें—भौतिक या डिजिटल—केवल इस्कॉन की संस्थागत संपत्ति हैं, और व्यक्तिगत अभिरक्षा के दावे या डेटा-सुरक्षा संबंधी सामान्य आपत्तियाँ विधिसम्मत संस्थागत शासन का स्थान नहीं ले सकतीं।

जबकि इन फ़ाइलों को सुरक्षित करने में विफलता इस्कॉन, जीबीसी और विधिवत् नियुक्त निकायों को बढ़ते कानूनी, नियामक और प्रतिष्ठा-संबंधी जोखिम में डालती है, जबकि वे अभिलेखों तक पहुँच के बिना कार्य करने में असमर्थ हैं।

जबकि 15 दिसंबर, 2025 को जीबीसी ईसी को दिए गए एक लिखित वक्तव्य में, पूर्व अंतरराष्ट्रीय CPO निदेशक ने कहा कि वे यूके डेटा-सुरक्षा कानून (यूके जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन कानून) के अंतर्गत दायित्वों के कारण डेटा हस्तांतरित करने में असमर्थ हैं।

जबकि इस्कॉन के महाधिवक्ता ने लंदन स्थित एक सुप्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विधि फ़र्म, टेलर वेसिंग से मार्गदर्शन लिया, जिसने पुष्टि की कि वर्तमान यूके GDPR कानून के अंतर्गत, मामला-फ़ाइलें जीबीसी की संपत्ति हैं, जिसने डेटा प्रसंस्करण के उद्देश्यों और साधनों का निर्धारण किया, और कि पूर्व अंतरराष्ट्रीय CPO निदेशक का फ़ाइलों के संबंध में कोई कानूनी अधिकार नहीं है, क्योंकि उन्होंने डेटा के स्वामी, नियंत्रक या प्रसंस्करणकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि केवल जीबीसी के एजेंट के रूप में कार्य किया, और कि डेटा तक पहुँच को प्रतिबंधित करके वे यूके GDPR का उल्लंघन कर रहे हैं।

अतः यह प्रस्तावित किया जाता है कि:

1. संस्थागत स्वामित्व की पुष्टि जीबीसी औपचारिक रूप से पुनः पुष्टि करती है कि बाल संरक्षण की सभी मामला-फ़ाइलें इस्कॉन की अनन्य संपत्ति हैं और इन्हें केवल वर्तमान में अधिकृत बाल संरक्षण निकायों द्वारा ही रखा जाना चाहिए।

2. तत्काल हस्तांतरण आवश्यक वर्तमान प्राधिकार के बिना ऐसी फ़ाइलें रखने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था को एतद्द्वारा निर्देश दिया जाता है कि वह सभी अभिलेख—पूर्ण, अपरिवर्तित और बिना किसी शर्त के—CPOC द्वारा निर्दिष्ट अभिरक्षा को हस्तांतरित करे। डिजिटल फ़ाइलों तक पहुँच इस प्रस्ताव के अपनाए जाने के 14 दिनों के भीतर प्रदान की जानी है। भौतिक फ़ाइलें इस प्रस्ताव के अपनाए जाने के 45 दिनों के भीतर प्रदान की जानी हैं।

3. विकेंद्रीकृत पुनर्प्राप्ति अधिकृत यदि अननुपालन बना रहता है, तो जीबीसी निकाय, संबंधित जीबीसी क्षेत्रीय सचिवों और क्षेत्रीय प्राधिकरणों के समन्वय में, निर्धारित समयावधि में मामला-फ़ाइलों का हस्तांतरण, वे जहाँ कहीं भी वर्तमान में रखी हों, सुनिश्चित करेगा।

4. कानूनी प्रवर्तन की अनुमति जीबीसी इस्कॉन के महाधिवक्ता को औपचारिक कानूनी नोटिस जारी करवाने और, यदि आवश्यक हो, रोके गए संस्थागत अभिलेखों की पुनर्प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त दीवानी कार्यवाही आरंभ करने के लिए अधिकृत करती है।

5. तत्काल उपचारात्मक कार्रवाई फ़ाइलों की पुनर्प्राप्ति न होने की स्थिति में, और इस्कॉन के सामने वर्तमान में उपस्थित आपात स्थिति को देखते हुए, जीबीसी फ़ाइलों की निरंतर अनुपलब्धता से उत्पन्न व्यावहारिक समस्याओं और उनके परिचालन परिणामों के प्रस्तावित समाधानों पर विचार करने के लिए CPOC के साथ एक तत्काल बैठक बुलाएगी।

6. दायित्व का स्पष्टीकरण इस्कॉन बाल संरक्षण फ़ाइलों से संबंधित किसी भी निरंतर प्रतिधारण, परिवर्तन या बाधा को विश्वास का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा, जिसका व्यक्तिगत दायित्व केवल उन्हीं पर होगा जो इस प्रस्ताव के विरोध में कार्य कर रहे हैं।

7. रिपोर्टिंग की अपेक्षा CPOC पूर्ण समाधान प्राप्त होने तक, ऊपर उल्लिखित विशिष्ट समय-सीमाओं के भीतर, फ़ाइल-पुनर्प्राप्ति की प्रगति की रिपोर्ट जीबीसी कार्यकारी समिति को देगी।

खंड 700: गुरु और शिष्य

702:05: इस्कॉन आध्यात्मिक गुरु: वैष्णवी दीक्षा-गुरु [शीर्षक] — वैष्णवी दीक्षा-गुरुओं के विषय में जीबीसी-आईबी समिति के निष्कर्ष — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — वक्तव्य [पारित तिथि] — 10 फ़रवरी, 2026

जबकि जीबीसी-इस्कॉन ब्यूरो संयुक्त समिति को यह उत्तरदायित्व दिया गया था कि वह इस विषय के समाधान हेतु जीबीसी को आगे का मार्ग सुझाए कि क्या वैष्णवियाँ

इस्कॉन में दीक्षा-गुरु बनने की सेवा ग्रहण कर सकती हैं।

जबकि इस समिति ने तब से आगे का मार्ग निकालने के लिए वैष्णवी दीक्षा-गुरुओं (VDG) और विभिन्न संबंधित विषयों पर चर्चा और विचार-विमर्श किया है।

जबकि इस्कॉन की अनेक अत्यंत योग्य वैष्णवियों ने भगवान चैतन्य महाप्रभु के मिशन में श्रील प्रभुपाद के मार्गदर्शन और संरक्षण में प्रशंसनीय सेवा की है और कर रही हैं।

जबकि जीबीसी-आईबी समिति ने निष्कर्ष निकाला कि इस्कॉन में गुरु की भूमिका की, श्रील प्रभुपाद की स्थिति, श्रील प्रभुपाद द्वारा स्थापित प्रबंधन-व्यवस्था, गुरु के शिष्यों तथा इस्कॉन के अन्य भक्तों के संबंध में, और अधिक जाँच और स्पष्टता की आवश्यकता है।

जबकि इस्कॉन में नेतृत्व की कोई सेवा लेने के लिए कौन योग्य है, यह निर्णायक रूप से निर्धारित करने के लिए, पहले यह निर्धारित करना आवश्यक है कि वह सेवा क्या है और उस सेवा को करने के लिए कौन-सी योग्यताएँ आवश्यक हैं।

जबकि इतने महत्त्वपूर्ण विषय पर विभिन्न पक्षों के एक सहमति पर पहुँचने के लिए न केवल शास्त्र-अध्ययन आवश्यक है, बल्कि एक-दूसरे के प्रति परस्पर सम्मान रखने वाले संबंधित खुले विचारों वाले नेताओं के बीच निरंतर चर्चा भी आवश्यक है। यह सहायक होगा यदि उन अंतर्निहित विषयों को पहचाना जाए जो इस विषय के सफल निष्कर्ष में बाधक हैं, और उनके समाधान के प्रयास किए जाएँ।

जबकि जीबीसी-आईबी समिति की चर्चाओं और विचार-विमर्श से समिति अब इस विषय के समाधान हेतु आगे का मार्ग प्रस्तुत कर सकती है। समिति का प्रस्ताव श्रील प्रभुपाद के निर्देशों और उदाहरण की जाँच के बाद तथा इस्कॉन की विभिन्न समितियों, नेताओं और विद्वानों से परामर्श के बाद तैयार किया गया।

अतः यह प्रस्तावित किया जाता है कि:

1. इस्कॉन के योग्य भक्तों के बीच श्रील प्रभुपाद की शिक्षाओं और उदाहरणों पर आधारित गुरु-तत्त्व पर एक निरंतर चर्चा होनी चाहिए। विवरणों पर आगे चर्चा की जा सकती है।

2. इस्कॉन के भीतर कुछ योग्य शिक्षा-गुरुओं को अधिक मान्यता और आध्यात्मिक अधिकार देने के लिए एक व्यवस्था होनी चाहिए।

3. योग्य वैष्णवियों या वैष्णवों को इन विशेष शिक्षा-गुरुओं के रूप में मान्यता दी जा सकती है।

4. जब तक वैष्णवी दीक्षा-गुरुओं से संबंधित विषय का संतोषजनक समाधान नहीं हो जाता, तब तक योग्य वैष्णवियों को केवल शिक्षा-गुरुओं के रूप में ही मान्यता दी जानी चाहिए।

5. वर्तमान समिति जीबीसी की इच्छा के अनुसार इस विषय पर आगे के शोध और चर्चाओं में सहायता के लिए उपलब्ध रहती है।

खंड 800: नियुक्तियाँ

802.01: जीबीसी पदाधिकारी और सदस्य: जीबीसी पदाधिकारी [शीर्षक] — जीबीसी पदाधिकारी — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य आदेश [पारित तिथि] — 4 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

1. मधु सेवित दास जीबीसी अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं

2. गोवर्धन दास (BCAIS) प्रथम उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं

3. देवकीनन्दन दास (MVG) द्वितीय उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं

4. रेवती रमण दास (JPS) जीबीसी सचिव निर्वाचित हुए हैं

802.02: जीबीसी पदाधिकारी और सदस्य: व्यक्तिगत सदस्य नियुक्तियाँ [शीर्षक] — कृष्ण प्रेमरूप दास कार्यवाहक जीबीसी सदस्य के रूप में नियुक्त — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — वक्तव्य [पारित तिथि] — 5 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

कृष्ण प्रेमरूप दास (BSDS) को जर्मनिक यूरोप के लिए सहायक जीबीसी सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाता है।

802.02: जीबीसी पदाधिकारी और सदस्य: व्यक्तिगत सदस्य नियुक्तियाँ [शीर्षक] — मथुरेश दास कार्यवाहक जीबीसी सदस्य के रूप में नियुक्त — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — वक्तव्य [पारित तिथि] — 4 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

मथुरेश दास (JPS) को एंडियन देशों के लिए कार्यवाहक जीबीसी सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाता है।

802.02: जीबीसी पदाधिकारी और सदस्य: व्यक्तिगत सदस्य नियुक्तियाँ [शीर्षक] — बी.बी. केशव स्वामी सहायक जीबीसी सदस्य के रूप में नियुक्त — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — वक्तव्य [पारित तिथि] — 5 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

भक्ति भागवतामृत केशव स्वामी (PVS) को दक्षिण रूस: स्फ़ीयर 4 के लिए सहायक जीबीसी सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाता है

802.02: जीबीसी पदाधिकारी और सदस्य: व्यक्तिगत सदस्य नियुक्तियाँ [शीर्षक] — उमापति दास सहायक जीबीसी सदस्य के रूप में नियुक्त — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — वक्तव्य [पारित तिथि] — 5 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

उमापति दास (GKG) को मध्य और पूर्वी अफ्रीका (बुरुंडी, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, जिबूती, इरिट्रिया, इथियोपिया, गैबॉन, केन्या, कांगो गणराज्य, रवांडा, दक्षिण सूडान, तंज़ानिया और युगांडा) के लिए सहायक जीबीसी सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाता है

802.02: जीबीसी पदाधिकारी और सदस्य: व्यक्तिगत सदस्य नियुक्तियाँ [शीर्षक] — इन्द्रेश गौर दास सहायक जीबीसी सदस्य के रूप में नियुक्त — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — वक्तव्य [पारित तिथि] — 5 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

इन्द्रेश गौर दास (BBGS) को उत्तरी अमेरिका: ज़ोन 1 (कनाडा, अलास्का, मिनेसोटा, मोंटाना, उत्तरी एवं दक्षिणी डकोटा और वायोमिंग) के लिए सहायक जीबीसी सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाता है।

802.04: जीबीसी पदाधिकारी और सदस्य: अवकाश पर व्यक्तिगत सदस्य [शीर्षक] — रोमपाद स्वामी का अवकाश — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य आदेश [पारित तिथि] — 4 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

रोमपाद स्वामी का अवकाश एक और वर्ष के लिए, फ़रवरी 2027 तक, बढ़ाया जाता है

802.04: जीबीसी पदाधिकारी और सदस्य: अवकाश पर व्यक्तिगत सदस्य [शीर्षक] — वीरबाहु दास का अवकाश — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य आदेश [पारित तिथि] — 4 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

वीरबाहु दास का अवकाश फ़रवरी 2027 तक बढ़ाया जाता है

802.04: जीबीसी पदाधिकारी और सदस्य: अवकाश पर व्यक्तिगत सदस्य [शीर्षक] — चैतन्य चन्द्र चरण दास का अवकाश — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य आदेश [पारित तिथि] — 4 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

चैतन्य चन्द्र चरण दास (JPS) को फ़रवरी 2027 तक अवकाश प्रदान किया जाता है।

804.01: संन्यास नियुक्तियाँ: संन्यास प्रतीक्षा-सूची [शीर्षक] — संन्यास प्रतीक्षा-सूची — 2025

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य आदेश [पारित तिथि] — 16 फ़रवरी, 2025

प्रस्तावित किया जाता है कि:

संन्यास के लिए उम्मीदवार निम्नलिखित हैं: शान्त नृसिंह दास (JPS) जयपुर इस वर्ष

रुक्मिणी कृष्ण दास (GKG) उत्तर भारत इस वर्ष

चारु चन्द्र दास (JPS) बांग्लादेश इस वर्ष*

*19 मार्च, 2026 को पत्राचार मतदान द्वारा पारित

805.01: मंत्रालय और स्थायी समिति नियुक्तियाँ: मंत्रालयों और स्थायी समितियों की पुनः पुष्टि [शीर्षक] — मंत्रालयों और स्थायी समितियों की पुनः पुष्टि — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य आदेश [पारित तिथि] — 5 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

2026-27 के लिए मंत्रालय और स्थायी समितियाँ तथा उनकी सदस्यता के कार्यभार निम्नलिखित हैं:

सामुदायिक (कॉन्ग्रिगेशनल) विकास मंत्रालय मंत्री: जयपताका स्वामी

इस्कॉन विग्रह पूजा मंत्रालय मंत्री: नृसिंह कवच दास (IDS) कार्यकारी निदेशक: देवदेव दास (BCAIS) सदस्य: मुरली मनोहर दास (SRS), मनोहर दास (SDG), राधा ठकुरानी देवी दासी (BCAIS), नर-नारायण दास (KDS), योगेन्द्र दास (BCAIS) इस्कॉन युवा मंत्रालय मंत्री: मनोरम दास (SNS) ग्रंथ वितरण मंत्रालय मंत्री: वैशेषिक दास संचार मंत्रालय मंत्री: अनुत्तम दास गौ-रक्षा एवं कृषि मंत्रालय मंत्री: कलाकण्ठ दास (IS) IMCPA निदेशक मंडल (यूएसए): निरंजन स्वामी, शेष दास, वैकुण्ठ दास (RS), कृष्ण किशोर दास (BCS), कलाकण्ठ दास (IS) शिक्षा मंत्रालय मंत्री: तपन मिश्र दास (BVKS) निधि विकास मंत्रालय मंत्री: देवकीनन्दन दास (जुहू) सदस्य: गोविन्द प्रेम दास (GKG), मुकुन्द माधव दास (BSDS), मदन गोपाल दास (SDG), नील माधव दास (BCS), विजय गोपीकेश दास (JPS) न्याय मंत्रालय मंत्री: चम्पकलता देवी दासी (IDS) ISKCONResolve सह-निदेशक: ब्रह्मतीर्थ दास, व्रज विहारी दास (BJD) इस्कॉन विवाद समाधान विभाग अध्यक्ष: प्रह्लादानन्द स्वामी (अध्यक्ष) उपाध्यक्ष: चम्पकलता दासी (IDS) सदस्य: देवकीनन्दन दास (MVG), हंसरूप दास, नन्द किशोर दास (GRS), व्रज विहारी दास (BJD), नवीन-श्याम दास (BCS), चन्द्रशेखर स्वामी पदयात्रा मंत्रालय मंत्री: श्री कृष्ण चैतन्य स्वामी (LOK) संन्यास सेवा मंत्रालय मंत्री: प्रह्लादानन्द स्वामी सदस्य: भक्ति गौरवाणी गोस्वामी, भक्तिवैभव स्वामी, भक्ति चैतन्य स्वामी, हृदय चैतन्य दास (SDG), देवकीनन्दन दास (जुहू) वैष्णवी मंत्रालय सह-मंत्री: राधा दासी (MG), सती देवी दासी (BTS) इस्कॉन महाधिवक्ता देवकीनन्दन दास (MVG) (अवकाश पर) जीबीसी नामांकन समिति अध्यक्ष: राधा कृष्ण दास (BBGS) सदस्य: तपन मिश्र दास (BVKS), भक्ति चैतन्य स्वामी, प्रघोष दास (SDG), अनुत्तम दास, रेवती रमण दास (JPS), गौरांग दास (RNS), अनिरुद्ध दास (BJD), देवकीनन्दन दास

(MVG) जीबीसी संगठनात्मक विकास समिति सह-अध्यक्ष: अनिरुद्ध दास (BJD), गौरांग दास (RNS), गोवर्धन दास (BCAIS) सदस्य: अनुत्तम दास, भक्ति चैतन्य स्वामी, भक्तिवैभव स्वामी, बद्रीनारायण स्वामी, जयपताका स्वामी, पंचरत्न दास, प्रघोष दास (SDG), रेवती रमण दास (JPS), चैतन्य अवतारी दास (JPS), देवकीनन्दन दास (जुहू), देवकीनन्दन दास (MVG), गौर कृष्ण दास (HDG), तपन मिश्र दास (BVKS), तीर्थराज दास (TKG), व्रज विहारी दास (BJD) जीबीसी रणनीतिक योजना दल अध्यक्ष: पंचरत्न दास सदस्य: अनन्त शेष दास (IDS), गोविन्द प्रिया देवी दासी (RNS), पारिजात दासी (RNS), आराध्य भगवान दास (BCS), तोषण निमाई दास

(RNS) बीबीटी-जीबीसी संबंध समिति समन्वयक: प्रघोष दास (SDG) सदस्य: बद्रीनारायण स्वामी, मधु सेवित दास, देवामृत स्वामी, भक्तिवैभव स्वामी, देवकीनन्दन दास (MVG), तपन मिश्र दास (BVKS), गोवर्धन दास (BCAIS) मथुरा मनोहर दास (JPS), बीबीटी न्यासी और BBTI निदेशक जीबीसी वैष्णव पंचांग समिति संयोजक: भक्तरूप दास सदस्य: भानु स्वामी, गोपालप्रिय दास (BVS), सदाशिवानन्द दास

(JPS) गुरु सेवा समिति अध्यक्ष: प्रह्लादानन्द स्वामी सदस्य: अनुत्तम दास, भक्ति चैतन्य स्वामी, रमाई स्वामी, भक्ति विज्ञान गोस्वामी (RNS), महात्मा दास, अर्चित दास, आनन्द तीर्थ दास (PVS) CPOC (बाल संरक्षण निरीक्षण समिति) गोविन्द लीलामृत देवी दासी (BHVS), आत्माराम दास (BTS), नित्यानन्द कारी देवी दासी (SNS) ICPO अंतरिम निदेशक: चम्पकलता देवी दासी (IDS) इस्कॉन कीर्तन मंत्रालय मंत्री: श्री कृष्ण चैतन्य स्वामी (LOK) सदस्य: जगन्नाथ कीर्तनानन्द दास (JPS), दीनानुकम्पा देवी दासी (LOK) जीबीसी एग्ज़ीक्यूटर्स प्रॉपर्टी ओवरसाइट कमेटी

(GEPOC) जयपताका स्वामी, नृसिंहानन्द दास, रामेश्वर दास, लोका देवी दासी (BTS), अक्षय रामचन्द्र दास (JPS), सत्यमेधा गौरांग दास (JPS)* शास्त्रीय सलाहकार परिषद अध्यक्ष: ऊर्मिला दासी सदस्य: भक्ति प्रभाव स्वामी (BCS), हरि पार्षद दास (RGS), नारायणी दासी, सर्वज्ञ दास (NRS), कार्तिक चन्द्र दास (RNS), महेन्द्र दास (SS) सहयोगी सदस्य: कृष्ण क्षेत्र स्वामी, द्रुतकर्मा दास, राधिका रमण दास (HPS), चैतन्य चरण दास (RNS), गोपीनाथ-आचार्य दास (KKS), भक्ति-विज्ञान गोस्वामी (RNS), गोपाल हरि दास (GKG), कनाई कृष्ण दास (RNS) नेतृत्व आचरण कार्यालय महाविष्णुप्रिया देवी दासी उत्तराधिकार समिति सह-संयोजक: चैतन्य अवतारी दास (JPS), गौरांग दास (RNS) सदस्य: अफ्रीका: उमापति दास (GKG), हरिदेव दास (BCAIS) मध्य पूर्व: श्रीवल्लभ दास (JPS), अनिरुद्ध गोपाल दास (JPS), व्रजप्राण दास (JPS) लैटिन अमेरिका: परमात्मा दास (SDG), प्रेम रूप माधव दास (JPS), देवकीनन्दन दास (HPS) यूरोप: कृष्ण प्रेमरूप दास (BSDS), पराभक्ति दास

(RNS) रूस एवं मध्य एशिया: अप्रमेयात्मा दास (SRS), आदि गोपीनाथ दास (GKG), दक्षिण-पूर्व एशिया: श्री नारायण दास (GKG), रघुनन्दन दास

(MVG) ओशिनिया एवं इंडोनेशिया: अनिरुद्ध दास (BJD), कृष्ण चन्द्र दास (BKG) उत्तरी अमेरिका: जय कृष्ण दास (SNS), गोविन्द प्रिया देवी दासी

(RNS) उत्तर भारत: ऋषिकुमार दास (GKG), सुन्दर गोपाल दास (GKG) पश्चिम भारत: मुकुन्द माधव दास (BSDS) पूर्व भारत: भक्ति विजय भागवत स्वामी (JPS) दक्षिण भारत: नारायण चैतन्य दास (JPS) वैष्णव स्मारक स्थायी समिति संयोजक: हृदय चैतन्य दास (SDG) सदस्य: भानु स्वामी, मालती देवी दासी, गौरांग दास (RNS), नृसिंह कवच दास (IDS), आनन्द तीर्थ दास (PVS) जीबीसी कार्यकारी सहायता कार्यालय कार्यकारी निदेशक: नन्द किशोर दास (GRS) कॉर्पोरेट सेवाएँ: कृष्णनाम दास (RNS) जीबीसी संचार: पारिजात देवी दासी (RNS) मंत्रालय एवं समिति सहायता: जयललिता देवी दासी (KKS) जीबीसी संसदीय विधि-विशेषज्ञ (पार्लियामेंटेरियन) नृसिंह कवच दास (IDS) जीबीसी सचिवालय कर्मचारी पत्राचार सचिव: आनन्द तीर्थ दास (PVS) ईसी सचिव: राधा सुन्दरी देवी दासी (RNS) कोषाध्यक्ष: महामणि गोविन्द दास (JPS) जीबीसी कार्यालय प्रबंधक: शुभ कृष्ण दास (RNS)

*GEPOC की सदस्यता पर मतदान नहीं हुआ था

807.01: लेखा-परीक्षक की नियुक्ति [शीर्षक] — लेखा-परीक्षक की नियुक्ति — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य आदेश [पारित तिथि] — 4 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

श्री रत्नेश सिंह चंदेल उर्फ़ रस परायण दास (GKG), पार्टनर, कोठारी चंदेल एंड कंपनी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, 219/220 कार्यालय सं. 2, मुरलीधर अपार्टमेंट, केलकर रोड, नारायण पेठ, पुणे 411030, को वर्ष 2026-27 के लिए वैधानिक लेखा-परीक्षक नियुक्त किया जाता है।

810.02: ग्लोबल ड्यूटी ऑफ़िसर नियुक्तियाँ: पुनर्नियुक्तियाँ [शीर्षक] — ग्लोबल ड्यूटी ऑफ़िसरों की पुनर्नियुक्ति — 2026

[बैठक] — वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] — कार्य आदेश [पारित तिथि] — 4 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

निम्नलिखित ग्लोबल ड्यूटी ऑफ़िसरों को एक और एक-वर्षीय कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त किया जाता है:

असिताराध्य दास (VVPS) भारत ग्लोबल ड्यूटीज़ कार्यालय इन्द्रेश गौर दास (BBGS) कनाडा गोविन्दाज़ मॉडल मुकुन्द माधव दास (BSDS) भारत जीबीसी वित्त राधेश्याम दास (RNS) भारत पूर्णकालिक युवा भक्तों की भर्ती श्यामानन्द कृष्ण दास (GKG) ऑस्ट्रेलिया पर्यावरण—ग्रीन टेम्पल इनिशिएटिव वैशेषिक दास यूएसए वन वर्ल्ड बुक डिस्ट्रीब्यूशन टीम

खंड 900: वित्तीय एवं कानूनी 901: जीबीसी वार्षिक बजट [शीर्षक] – जीबीसी वार्षिक बजट — 2026

[बैठक] – वार्षिक आम बैठक [श्रेणी] – कार्य आदेश [पारित तिथि] – 4 फ़रवरी, 2026

प्रस्तावित किया जाता है कि:

2026-27 के लिए जीबीसी बजट (INR में) इस प्रकार है:

बाल संरक्षण निरीक्षण समिति (CPOC) 39,60,000

दण्डवत्स (Dandavats) 630,000

प्रतिनिधि (डेप्युटीज़) — सहायक हेतु यात्रा 90,000

आपातकालीन निधि 450,000

कार्यकारी समिति यात्रा 450,000 वित्त एवं बैंक शुल्क 67,500 जीबीसी वार्षिक आम बैठक 540,000 जीबीसी पत्राचार सचिव 594,000 जीबीसी ईसी सचिव 594,000 जीबीसी रणनीतिक योजना दल 225,500

गुरु सेवा समिति 225,000 इस्कॉन सामुदायिक विकास मंत्रालय 540,000 इस्कॉन कनेक्शन 180,000 इस्कॉन विग्रह पूजा मंत्रालय 9,22,500 इस्कॉन वैश्विक संपत्ति कार्यालय 540,000 इस्कॉन कीर्तन मंत्रालय 180,000

इस्कॉन विधि विभाग 9,00,000

इस्कॉन न्यूज़ 450,000

ISKCON Resolve 720,000

इस्कॉन युवा मंत्रालय 174,000

नेतृत्व आचरण कार्यालय 450,000

मायापुर जीबीसी कार्यालय एवं लेखा 540,000

गौ-रक्षा एवं कृषि मंत्रालय 675,000

शिक्षा मंत्रालय 720,000

न्याय मंत्रालय 450,000 पदयात्रा मंत्रालय 180,000 संन्यास सेवा मंत्रालय 270,000

सभा (SABHA) 270,000 श्रील प्रभुपाद व्यास-पूजा ग्रंथ 270,000 वैष्णव स्मारक स्थायी समिति 180,000 वैष्णवी मंत्रालय 225,000

कुल 16,488,000